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धोनी की चाहत में फंसा आम्रपाली ग्रुप, कर दिया साढ़े छह करोड़ रुपयों का अवैध डायवर्जन

Supreme के फॉरेंसिक ऑडिटर्स की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आम्रपाली ग्रुप ने महेंद्र सिंह धोनी की उपलब्धता के लिए होम बायर्स का रुपया अवैध तरीके से रिति मैनेज्मेंट को डायवर्ट किया।

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Saurabh Sharma

Jul 25, 2019

MSD

नई दिल्ली।आम्रपाली ग्रुप ( Amrapali Group ) के हो रहे फॉरेंसिक ऑडिट ( forensic audit ) में कई नई बातें सामने निकलकर आ रही है। अब जो बात सामने आई है उसमें इंडियन क्रिकेट के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ( Mahendra Singh Dhoni ) का नाम शामिल है। वास्तव में आम्रपाली ग्रुप ने रिति स्पोट्र्स मैनेज्मेंट को साढ़े छह करोड़ रुपए देकर यह शर्त रखी कि तीन दिनों के लिए महेंद्र सिंह धोनी ग्रुप के लिए उपलब्ध हों। ऑडिटर्स का मानना है कि स्पोट्र्स मैनेज्मेंट कंपनी को जो रुपया दिया गया, वो होम बायर्स ( home buyers ) का था जो कंपनी के वसूल किया जाना चाहिए।

धोनी की मोहब्बत में फंसा ग्रुप
आम्रपाली ग्रुप ने रुपए देते समय किसी तरह का कोई एग्रीमेंट या प्रस्ताव पास नहीं किया था। यह रुपया देते समय रिति स्पोट्र्स मैनेज्मेंट के साथ करार किए गए थे। फॉरेंसिक ऑडिटर्स की रिपोर्ट को मानें तो आम्रपाली ग्रुप की ओर से रिति मैनेज्मेंट के सामने शर्त रखी थी कि वो ग्रुप के लिए महेंद्र सिंह धोनी को सिर्फ तीन दिनों के लिए उपलब्ध कराए। आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धौनी आम्रपाली ग्रुप के ब्रैंड एंबेस्डर भी रहे हैं।

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आम्रपाली के इस प्रोजेक्ट की ओर से दिए गए थे
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार रिति स्पोट्र्स मैनेज्मेंट को यह रुपया आम्रपाली ग्रुप के आम्रपाली शफायर डिवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने दिया था। वास्तव में यह रुपया 2009 से लेकर 2015 के बीच में दिश्या गया। जिसके तहत ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा ने करार पर साइन किए थे। वैसे इन करारों में किसी तरह का प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था।

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सीएसके लिए सादे कागज पर हुआ करार
ऑडिट में जो सबसे चौंकाने वाली बात जो सामने आई है वो ये है कि चेन्नई सुपरकिंग्स के लोगो पर आम्रपाली को विज्ञापन का अधिकार मिला वो सिर्फ सादे कागज पर था। उस सिर्फ आम्रपाली और रिति स्पोट्र्स के अधिकारियों के साइन था। सीएसके के अधिकारियों के साइन ही नहीं थे। वास्तव में ग्रुप की ओर से रुपए रिति को जो भी ट्रांजेक्शन हुआ वो पेमेंट करने के इरादे से हु
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Patrika Hindi News Appआ। सभी करार फर्जी थे। फॉरेंसिक ऑडिटर्स की मानें तो यह रुपया होम बॉयर्स का था, जो अवैध तरीके से डायवर्ट हुआ। जिसे वापस लिया जाना जरूरी है।

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