
बजरी खनन रोक से रियल एस्टेट कारोबार ठप हो गया है। इससे प्रदेश में 550 बहुमंजिला इमारतों के साथ 10 हजार से ज्यादा निर्माण ठप हो गए हैं। बिल्डरों ने राज्य सरकार से तत्काल बजरी खनन के लिए छोटे स्तर पर लीज देने की जरूरत जताई है।
इनमें नदी किनारे किसान—काश्तकारों को भी खनन के लाइसेंस देने की राय दी गई है, जिससे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी पालना हो सके। ऐसा नहीं होने और बजरी खनन पर रोक लगे रहने से निर्धारित समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने में असमर्थता जता दी है। उनका तर्क है कि रेरा (रियल एस्टेट कानून) के तहत प्रोजेक्ट पूरा करने की मियाद तो तय है लेकिन बजरी नहीं होने से काम ठप है। ऐसे में समय पर प्रोजेक्ट पूरा हो नहीं सकता। इसके लिए क्रेडाई राजस्थान प्रतिनिधि निर्धारित मियाद बढ़ाने की छूट देने के लिए रेरा अध्यक्ष (अतिरिक्त मुख्य सचिव, नगरीय विकास विभाग) मुकेश शर्मा से मिले और प्रोजेक्ट मियाद बढ़ाने की जरूरत जताई।
बैंक लोन चुकाना हो रहा मुश्किल
क्रेडाई के संयुक्त सचिव हितेश धानुका ने स्पष्ट कर दिया कि रियल एस्टेट कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रोजेक्ट के लिए बैंकों से लिए लोन की किस्त चुकाना मुश्किल हो गया है। काम नहीं होने से बैंक भी बाकी लोन राशि नहीं दे पा रहा है। इससे आशियाने की बुकिंग कराने वालों को भी समय पर पजेशन नहीं दिया जा सकेगा।
तीन साल पहले कोर्ट ने चेताया था
क्रेडाई ने हालात के लिए सरकार को जिम्मेदार बताया। क्रेडाई राजस्थान के चेयरमैन गोपाल गुप्ता ने बताया कि करीब 3 वर्ष पहले ही कोर्ट ने सरकार को पर्यावरणीय एनओसी देने के लिए चेताया था, लेकिन सरकार ने दायित्व पूरा नहीं किया। इस कारण ऐसे हालात देखने को पड़ रहे हैं।
एमपी है नजीर, नीति अपनाने की जरूरत
क्रेडाई अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश में पंचायत स्तर पर खनन के अधिकार दिए गए हैं। प्रदेश में भी छोटे लीजधारक बनाने होंगे। अभी 80 ही लीज धारक हैं। इससे स्थानीय इलाके का विकास होगा और जीवन स्तर भी सुधरेगा।
50 लाख रुपए तक आवास हों अफोर्डेबल
रिजर्व बैंक ने 50 लाख रुपए तक के घर को अफोर्डेबल हाउसिंग में माना है। क्रेडाई ने सरकार से भी 50 लाख रुपए तक के आवास को अफोर्डेबल की श्रेणी का दर्जा देने की मांग की है। इससे प्रदेश के जरूरतमंद लोगों को आसानी से आशियाना उपलब्ध होगा।
Updated on:
13 Jan 2018 11:10 am
Published on:
13 Jan 2018 11:08 am
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