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दिवालिया सम्बंधी कानून में बदलाव, घर खरीदारों को मिली बड़ी राहत

पहले के नियम में बैंक और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को छोडक़र अन्य पक्षों के हितों की अनदेखी हुई थी
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Sunil Sharma

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Updated: 11 Oct 2017, 2:02 PM IST

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नई दिल्ली। इन्सॉल्वंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया ने दिवालियापन कानून में बदलाव करते हुए यह दर्शाना अनिवार्य कर दिया है कि किसी कंपनी के रेजॉलूशन प्लान में सभी पक्षों के हितों का ध्यान कैसे रखा जाएगा। इस संशोधन से यह सुनिश्चित होगा कि बैंक और लोन देनेवाले अन्य संस्थान कार्रवाई से प्रभावित दूसरे स्टेकहोल्डर्स के हितों की शर्त पर अपने हित नहीं साधकर नहीं बच सकते।

बैंक क्रेडिटर्स कमिटी का हिस्सा होते हैं जिनकी किसी कंपनी के दिवालिया होने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण नीति-निर्माता की भूमिका होती है। रियल एस्टेट एक्सपर्ट के मुताबिक नियमों में बदलाव से एक गैप भर गया है । नए कानून से फ्लैट बायर्स के हितों की रक्षा की जाएगी।

होम बायर्स की हुई थी अनदेखी
इन्सॉल्वंसी विशेषज्ञ का कहना है कि कानून के तहत कॉर्पोरेट कर्जदार (कंपनी) और इसके स्टाफ, मेंबर्स, क्रक्रेडिटर्स, गारेंटर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स रेजॉलूशन प्लान में शामिल होते हैं। लेकिन, पहले के नियम में बैंक और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को छोडक़र अन्य पक्षों के हितों की अनदेखी हुई थी।

आयकर नियमों को सरल बनाने की तैयारी
जीएसटी के बाद अब सरकार करीब 50 साल पुराने डायरेक्ट टैक्स नियमों को सरल करने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार 2018 तक एक नया बिल लाने की तैयारी कर रही है। नये नियम के तहत कई तरह के फॉर्म को खत्म कर एक करने पर फोकस कर रही है। वहीं टैक्स रिफंड संबधी विवादो का भी तेज निस्तारण किया जा सकेगा। दरअसल हालांकि इससे पहले भी डायरेक्ट टैक्स में आमूल चूल परिवर्तन के लिए प्रयास किए गए, लेकिन सफल नहीं रहे।

इससे पहले 2009 में डायरेक्ट टैक्स कोड के तहत कई छूटों और उदार टैक्स स्लैब को हटाने सहित कई बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन इसबार सरकार इस कदम के जरिए ज्यादा से ज्यादा नए आयकरदाता जोडऩा चाहती है। गौरतलब है कि मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 10 साल के निचले स्तर पर आ चुका है। इसलिए सरकार नियमों को दुरूस्त कर आंकड़ें में सुधार करना चाह रही है। अगर, ऐसा होता है तो इसका फायदा आयकर दता और सरकार दोनों को होगा।