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मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को दिया झटका, टूट सकता है घर बनाने का सपना

मोदी सरकार के इस कदम से केंद्रीय कर्मचारियों को घर बनाना मुश्किल हो गया है।

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मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को दिया झटका, टूट सकता है घर बनाने का सपना

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के अपना घर बनाने के सपने को बड़ा झटका दिया है। इससे केंद्रीय कर्मचारियों की घर बनाने की उम्मीदें टूट सकती हैं। केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को दिए जाने वाले आवास ऋण की शर्तों में बदलाव कर दिया है। 1 अगस्त 2018 को केंद्रीय आवास मंत्रालय की ओर से जारी मेमो के अनुसार, आवास ऋण नियमावली के पैरा 2(i) में बदलाव के बाद केंद्रीय कर्मचारियों का घर बनाना मुश्किल हो गया है।

यह बदलाव हुआ

केंद्रीय आवास मंत्रालय की ओर से आवास ऋण नियमावली में किए गए बदलाव के बाद घर बनाने के लिए ऋण लेने वाले कर्मचारी के पास अपनी जमीन होनी चाहिए। मेमो के अनुसार, जिस जमीन पर कर्मचारी मकान बनाना चाहता है उसका मालिकाना हक कर्मचारी या उसकी पत्नी या संयुक्त रूप से दोनों के नाम पर होना चाहिए। यदि एेसा नहीं होता है तो कर्मचारी को ऋण नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा घर का विस्तार करने को लिए जाने वाले ऋण के लिए भी यह शर्त लागू होगी। अभी तक यह शर्त लागू नहीं थी।

2017 में बढ़ गई थी ऋण सीमा

पिछले साल सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा लाभ हुआ था। इसमें केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले ऋण की सीमा भी बढ़ गई थी। 9 नवंबर 2017 को जारी मेमो के अनुसार, सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आवास ऋण सीमा साढ़े सात लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपए या कर्मचारी के 34 माह के बेसिक वेतन के बराबर कर दी गई थी।

मकान की कीमत में भी हुआ था बदलाव

सातवें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए मकान की कीमत की सीमा में भी बढ़ोतरी कर दी गई थी। सातवें वेतन आयोग में मकान की कीमत सीमा 30 लाख रुपए से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए कर दी गई थी। इसके अलावा पिछले साल के बदलावों के अनुसार, यदि पति-पत्नी दोनों केंद्रीय कर्मचारी हो तो दोनों को अलग-अलग आवास ऋण देने को मंजूरी दी गई थी। अभी तक दोनों को अलग-अलग ऋण नहीं मिलता था।