
केन्द्र में शासित मोदी सरकार ने यूपीए के कार्यकाल में शुरू की गई राजीव आवास योजना की जांच कराने का फैसला किया है। इस योजना के तहत बनाए गए और नए बन रहे एक लाख से अधिक घरों की क्वालिटी की जांच की जाएगी। इस काम का जिम्मा सेंट्रल सेंक्शनिंग एंड मॉनिटरिंग कमेटी (सीएसएमसी) को सौंपा गया है।
सीएसएमसी ने उन सभी राज्यो को इसका पालन करने के लिए कहा गया है जहां पर राजीव आवास योजना के प्रोजक्ट्स पूरे हो चुके है या चल रहे है। बता दें यूपीए सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में गरीबों को घर दिलाने के लिए स्लम फ्री इंडिया मिशन शुरू किया था, जिसका उद्देश्य साल 2022 तक देश को स्लम फ्री बनाना था। इसी मिशन के तहत राजीव आवास योजना शुरू की गई थी और केन्द्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद इस योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ मर्ज कर दिया गया।
मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राजीव आवास योजना के तहत राज्यों में 162 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इनमें 1 लाख 17 हजार 707 घर बनाने की मंजूरी दी गई। इसमें से 46611 घर बनकर तैयार हो चुके हैं। यहां तक कि लगभग 26234 घरों में लोगों ने रहना भी शुरू कर दिया है। 44225 घर पर अभी काम चल रहा है और 26871 घर बनाने का काम अभी शुरू होना बाकी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए गठित सेंट्रल सेंक्शनिंग एंड मॉनिटरिंग कमेटी (सीएसएमसी) की 30 वीं मीटिंग में पाया गया कि कई राज्यों और यूटी में अभी तक थर्ड पार्टी क्वालिटी एंड मॉनिटरिंग एजेंसी नियुक्त नहीं की गई है। इसलिए सेंट्रल कमेटी ने राज्यों से कहा कि वे जल्द से जल्द अपने राज्य में एजेंसी नियुक्त कर लें। जो न केवल प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग के साथ-साथ क्वालिटी जांच करें, बल्कि इस एजेंसी से राजीव आवास योजना के प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी टेस्ट और मॉनिटरिंग भी कराई जाए।
दूसरी ओर प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) के तहत देश भर में दो करोड़ घरों बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यह घर 2022 तक बनाए जाने हैं। इस काम के लिए केन्द्र सरकार ने मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स को नियुक्त किया है। इसी योजना में राजीव आवास योजना को भी शामिल कर लिया गया है।
Published on:
12 Mar 2018 02:56 pm
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