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मास्टर प्लान मामला: हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, सरकार को फटकार

सुनवाई के दौरान न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एम एस सिंघवी ने बताया कि जयपुर के पृथ्वीराज नगर से संबंधित नियमन में भारी अनियमितताएं हैं।

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Sunil Sharma

Nov 25, 2017

ramgarh dam

rajasthan high court

जोधपुर/ जयपुर। हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित प्रधान पीठ ने जयपुर के पृथ्वीराज नगर के नियमन को लेकर टिप्पणी की है कि वे लोग कौन हैं, जो ऊपर बैठकर नियमन का धंधा चला रहे हैं? क्या राज्य में गरीबों का स्तर ऊंचा हो गया है? कौन गरीब है, जिसे एक हजार गज का प्लॉट चाहिए।

न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व न्यायाधीश अरुण भंसाली की खण्डपीठ ने राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पत्र याचिका सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शुक्रवार को यह टिप्पणी की। कोर्ट ने जेडीए से नियमन पर जारी परिपत्र १२ दिसम्बर को पेश करने को कहा है। यह भी बताने को कहा कि इन परिपत्रों को किस-किस अधिकारी ने जारी किया।

जयपुर के लोक संपत्ति संरक्षण समिति के पीएन मैन्दोला ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि पृथ्वीराज नगर योजना में करीब बीस हजार करोड़ रुपए का गबन हुआ और सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व का नुकसान हुआ है।

सरकार आखिर राज्य को क्या बनाना चाहती है
मास्टर प्लान मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि सरकार आखिर इस राज्य को बनाया क्या चाहती है। न्यायालय के निर्णयों की पालना नहीं करने के लिए नए-नए तरीके इजाद किए जा रहे हैं। साथ ही यह भी कहा कि सरकार विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम नहीं कर रही है।

खुर्दबुर्द की जा रही ११ हजार बीघा जमीन
न्यायमित्र सिंघवी ने कहा कि जेडीए भूमाफियाओं से मिलकर करोड़ों रुपए कीमत की पृथ्वीराज नगर की ११ हजार बीघा भूमि को खुर्दबुर्द कर रहा है। सरकार ने पृथ्वीराज नगर योजना के लिए 30 सितम्बर 2014 को सर्कुलर जारी कर दरों का निर्धारण किया था। इनमें 100 वर्गगज तक के आवासीय भूखंड के लिए 250 रुपए और व्यावसायिक भूखण्ड़ के लिए 750 रुपए की दर तय की गई।

बड़े भूखंडों की दरों का भी निर्धारण किया गया, लेकिन बाजार मूल्य की बात करें तो सडक़ पर आवासीय भूखंड की दर 12250 व अन्दर 10400 रुपए है। व्यावसायिक में सडक़ पर 45230 रुपए व अन्दर 29870 रुपए हैं। इससे करोड़ो रुपए की राजस्व हानि हो रही है। पृथ्वीराज नगर योजना बिना मास्टर प्लान व जोनल प्लान के बनाई गई है। हाईकोर्ट की जयपुर स्थित पीठ ने भी आदेश दे रखे हैं कि बिना जोनल व सेक्टर प्लान कोई आवासीय योजना नही बनाई जा सकती, लेकिन कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र एमएस सिंघवी, विनीत दवे, अभिनव भण्डारी व जेडीए अधिकारी उपस्थित थे।

नियमन में बताई अनियमितता
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एम एस सिंघवी ने बताया कि जयपुर के पृथ्वीराज नगर से संबंधित नियमन में भारी अनियमितताएं हैं। नियमन न केवल व्यवस्थित विकास के विरुद्ध किया है, बल्कि हाईकोर्ट के १२ जनवरी २०१७, ८ अगस्त २०१७ व १४ अक्टूबर २०१७ के निर्देशों की अवहेलना है। जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से कहा कि जेडीए राज्य सरकार के आदेशानुसार कार्य कर रहा है और उसके अनुसार गृह निर्माण सहकारी समितियों द्वारा बसाई कॉलोनियों का नियमन सही किया है।