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रेरा इफेक्टः पूरी हुई परियोजनाओं की मांग में तेजी से इजाफा

रेरा के बाद रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी की बिक्री में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। देश के 51 शहरों में लगभग 50,000 रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी की बिक्री हुई हैं

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Sunil Sharma

Oct 28, 2017

RERA

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नई दिल्ली। रियल एस्टेट एक्ट (रेरा) आने के बाद देश में एक व्यवस्थित रियल एस्टेट बिजनेस का शुरूआत हो गई है। जहां एक ओर इससे घर खरीदारों में भरोसा बढ़ा है तो दूसरी ओर डवलपर्स पर पारदर्शिता, जवाबदेही और समय से प्रोजेक्ट को पूरा करने का दबाव बढ़ गया हैं। इसके चलते रियल एस्टेट सेक्टर को भी लाभ हुआ है। इंडस्ट्री के लिहाज से देखें तो प्रॉपर्टी बाजार में फिर से निवेशकों का भरोसा लौट आया है। सिर्फ घरेलू ही नहीं, बल्कि विदेशी निवेशक भी एक बार फिर से प्रॉपर्टी बाजार की ओर अकर्षित हो रहे हैं।

निवेशकों की पहली पसंद तैयार प्रोजेक्ट
रेरा के बाद रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी की बिक्री में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। देश के 51 शहरों में लगभग 50,000 रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी की बिक्री हुई हैं। बैंक से लोन लेने वाले लोगों को सबसे ज्यादा रेडी टू मूव प्रापॅपटी भा रहा हैं। क्योंकि उनके लिए ईएमआई लगभग मासिक किराया के तरह ही देना होता हैं। तैयार प्रोजेेक्ट में प्रॉपर्टी खरीदना सिर्फ एंड यूजर्स को ही नहीं बल्कि निवेशकों को भी रास आ रहा है।

रेरा रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट की बढ़ी मांग
केबी-वन के डायरेक्टर ऋषि सिंह ने बताया कि रेरा लागू होने के बाद से कई नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा हुई है और बाजार में इसी डिमांड में भी बढ़ोतरी देखने को मिली हैं। खरीदार अब वैसे ही प्रोजेक्ट में निवेश कर रहे हैं जो रेरा के अंतर्गत रजिस्टर्ड है। एक बात साफ है कि रेरा से मार्केट में साफ-सुथरी छवि वाले और प्रतिष्ठित डवलपर्स के लिए अच्छा हुआ है। प्रॉपर्टी खरीदने वाले भी अब सही प्रॉपर्टी में निवेश कर रहे हैं।

इसलिए निवेशकों का बढ़ा रुझान
अधिकांश निवेशक किराए पर देने के लिए या रीसेल विकल्प के लिए खरीदते हैं। इसलिए उन्हें पूरे हुए प्रोजेक्ट्स को खरीदने से तुरंत कमाई करने का भी विकल्प होता हैं। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा ने बताया कि अब निवेशक इस बात को समझ गए हैं कि थोड़ा पैसा अधिक लगाकर रेडी टू मूव ही खरीदना फायदे का सौदा है। कोई भी अब अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में घर खरीदना नहीं चाह रहा है।

बिना रेरा रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट की बिक्री नहीं
रियल एस्टेट एक्सपर्ट मुकेश झा ने बताया कि तैयार प्रोजेक्ट की मांग इसलिए भी बढ़ी है क्येंकि अधिकतर निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स का अभी भी रेरा के अंतर्गत पंजीकरण नहीं हुआ हैं। यदि कोई निर्माणाधीन प्रोजेक्ट खरीदना भी चाहता है तो डवलपर उसे बेच नहीं सकता।