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आम्रपाली मामला : फ्लैट खरीदारों को कब्जा सौंपने में देरी अधिकारियों को पहुंचाएगी जेल

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा ग्रेनो प्राधिकरण अधिकारियों को लिया आड़े हाथ अधिकारियों ने बताया, समस्या को निपटाने के लिए बनाई विशेष सेल

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Saurabh Sharma

Aug 13, 2019

Amrapali Group

नई दिल्ली। आम्रपाली मामले में ग्रुप के मालिकों के अलावा अब सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों के खिलाफ सख्ती अपना ली है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ हिदायत दे दी है कि अगर फ्लैट खरीदारों को समय पर उनका मकान नहीं मिला तो उन्हें भी जेल में डाल दिया जाएगा। वास्तव में आज दोनों प्राधिकरण के अधिकारी अपना पक्ष और आम्रपाली को लेकर अपना प्लान लेकर पहुंचे थे।

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प्राधिकरण अधिकारियों पर कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर खरीदारों को फ्लैटों का कब्जा सौंपने में उनकी ओर से कोई देरी हुई तो नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों को जेल भेजा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के इस रवैए के बाद सभी अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं। वहीं मामलों के निपटारे के लिए अपनी ओर से जुट गए हैं। वहीं कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों को आम्रपाली के फ्लैट खरीदने वाले ग्राहकों के पक्ष में फ्लैटों का पंजीकरण शुरू करने का निर्देश दिया। एक महीने के भीतर त्रिपक्षीय समझौते को निष्पादित करने के लिए भी आदेश दिया गया है, जहां खरीद करने वाले निवास कर रहे हैं।

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बनाया है विशेष सेल
मंगलवार को प्राधिकरणों के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने आम्रपाली फ्लैट के खरीदारों की समस्याओं से निपटने के लिए एक विशेष सेल बनाया है। अधिकारियों ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ को बताया कि उन्होंने खरीदारों के मामलों से निपटने के लिए सेल बनाया है और अधिकारियों को विशेष रूप से इस मुद्दे को देखने के लिए नियुक्त किया गया है।

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कंपनी के लाइसेंस को किया रद
23 जुलाई को शीर्ष अदालत ने रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली ग्रुप के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के लाइसेंस को रद्द कर दिया और सभी लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए राज्य द्वारा संचालित नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्प लिमिटेड (एनबीसीसी) को नियुक्त किया। कोर्ट ने पाया है कि समूह ने प्रथम दृष्ट्या (फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट) का उल्लंघन किया है और मनी लॉन्ड्रिंग सहित अन्य धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल रहा है और अपराधियों की पहचान करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गहन जांच की सिफारिश की है।

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