
bajri sand real estate property
जयपुर। बजरी खनन पर लगी रोक से शहर में निर्माणाधीन कई प्रोजेक्ट थमने के कगार पर हैं। जनता की सुविधाओं से जुड़े इन सभी प्रोजेक्ट की गति 60 से 70 फीसदी तक मंद हो गई है। द्रव्यवती नदी (अमानीशाह नाला) प्रोजेक्ट भी इससे अछूता नहीं है लेकिन सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट होने के कारण जेडीए अफसर इसे समय पूरा करने में जुट गए हैं। इसके लिए करीब 400 किलोमीटर दूर से दोगुनी दर पर बजरी लाने की तैयारी चल रही है।
सरकार ने दोबारा निर्देश दिए हैं कि द्रव्यवती प्रोजेक्ट का काम 15 अगस्त तक पूरा हो जाना चाहिए। इसके बाद जेडीए ने अनुबंधित कंपनी टाटा प्रोजेक्ट्स को वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। कंपनी ने बीकानेर से बजरी मंगवाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सैम्पल मंगाकर जॉब मिक्स टेस्ट किया जा रहा है। इसके अलावा एम-सेंड (स्टोन डस्ट) का उपयोग करने पर भी मंथन चल रहा है।
तिगुनी वसूली
इधर जयपुर मंडी में २५० फीट का जो ट्रक ९५०० से १० हजार के बीच मिल रहा था, उसके २८ से ३० हजार लिए जा रहे हैं। कई जगह पुराना स्टॉक होने के नाम पर कालाबाजारी हो रही है, कहीं खनन-परिवहन की शिकायतें हैं।
द्रव्यवती नदी : रोजाना 800 टन खपत, अब प्लांट खाली
द्रव्यवती नदी में हर दिन 700 से 800 टन बजरी का उपयोग किया जाता रहा है लेकिन 24 नवम्बर को केवल 150 टन बजरी का काम हो सका है। सुशीलपुरा पुलिया के पास बने बैचिंग प्लांट में भी बजरी का स्टॉक खत्म हो गया।
बीकानेर के पास से बजरी का सैम्पल मंगवाया गया है। जयपुर से वहां की दूरी करीब 400 किलोमीटर है। बनास से बजरी 700 रुपए टन में आ रही थी, अब बीकानेर से मंगवाने में 1500 रुपए टन के दाम चुकाने होंगे।
दोगुनी लागत को देखते हुए कंपनी अब एम-सेंड (स्टोन डस्ट) का उपयोग करने का विकल्प तलाश रही है। यह डस्ट पत्थर से निकलती है, जो बजरी का विकल्प होता है। दिल्ली, आंध्रप्रदेश में इसी डस्ट का उपयोग किया जाता रहा है।
बस्सी आरओबी
०५ दिन का बजरी स्टॉक
३३ करोड़ रुपए है लागत
०५ करोड़ रुपए का हुआ है काम
६२० मीटर है लम्बाई
१७.१० मीटर है चौड़ाई
२०१९ जनवरी तक निर्धारित मियाद
एलीवेटेड रोड
१० दिन का बजरी स्टॉक
२४९ करोड़ रुपए है लागत
२८ करोड़ रुपए का हुआ है काम
२.८ मीटर है लम्बाई
०७ मीटर है चौड़ाई
२०१८ अगस्त तक निर्धारित मियाद
Published on:
26 Nov 2017 09:27 am
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