
kaliyuga effect
प्राचीन शास्त्रों में लिखा है कि कलियुग की समाप्ति पर भगवान स्वयं अवतार लेकर समस्त अधर्मियों का संहार करेंगे तथा पृथ्वी के पाप हरेंगे। कल्कि पुराण के अनुसार भगवान विष्णु पृथ्वी के भार को हरने के लिए कल्कि अवतार के रूप में आएंगे और मात्र तीन दिनों में पुनः धर्म की स्थापना होगी। कल्कि पुराण में बताया गया है कि भगवान के अवतार लेने के ठीक पहले कुछ ऐसे लक्षण होंगे जो असामान्य होंगे और धरती पर बढ़ते पाप का का चरम लक्षण तथा भगवान के आने का संकेत होंगे। इस पोस्ट में हम ऐसे ही लक्षणों के बारे में पढ़ेंगेः
(1) सबसे पहले सभी तीर्थस्थलों की महिमा समाप्त होगी। वहां अनाचार होने लगेगा और तीर्थस्थल धर्म के बजाय अधर्म का रास्ता दिखाएंगे।
(2) धरती की नदियां सूख जाएंगी। गंगा स्वयं बैकुंठ में प्रस्थान कर जाएगी और अकाल के चलते पेड़-पौधे सब सूख जाएंगे जिससे पूरी सृष्टि त्राहि-त्राहि कर उठेगी।
(3) मनुष्य जाति का पतन होगा तथा लोग छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए भी बेईमानी, हत्या जैसे अपराधों से पीछे नहीं हटेंगे। चहुंओर अनैतिक कारणों से कमाई संपत्ति दिखाई देगी।
(4) मनुष्य नास्तिक हो जाएगा और धर्म के रूप में अधर्म की पूजा होने लगेगी। स्वयं का स्वार्थ पूरा करना ही सबसे बड़ा धर्म होगा।
(5) पिता ही पुत्री का शीलहरण करेगा, पुत्र अपने माता-पिता की सेवा की जगह उन्हें दंड देगा।
(6) पति-पत्नी व्यभिचारी हो जाएंगे। उनमें आपसी प्रेम नहीं होगा वरन अन्य स्त्री-पुरुषों के साथ उनके संबंध होंगे।
Published on:
10 Sept 2016 03:59 pm
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