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Vishwakarma Jayanti 2023: विश्वकर्मा जयंती पर पूजा के शुभ मुहूर्त, साथ ही जानें इस दिन का महत्व

- देवताओं के महलों के इंजीनियर और वास्तुकार भगवान विश्कर्मा की जयंती...

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Deepesh Tiwari

Sep 15, 2023

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Vishwakarma Jayanti 2023 Date: देवताओं के महलों के इंजीनियर और वास्तुकार भगवान विश्कर्मा की जयंती हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रति वर्ष कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। ऐसे में इस साल यानि 2023 में रविवार, 17 सितंबर को भगवान विश्कर्मा की जयंती मनाई जाएगी। इस दिन देवताओं के शिल्पकार भगवान विश्कर्मा की पूजा का विधान है। मान्यता है कि ब्रह्माजी के पुत्र धर्म से वास्तुदेव उत्पन्न हुए। वास्तुदेव की अंगिरसी नामक पत्नी से विश्वकर्मा का जन्म हुआ।

माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही प्राचीन काल में देवताओं के महल और अस्त्र-शस्त्र बनाए थे इसलिए इन्हें निर्माण का देवता भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा जी ने ब्रह्माजी के निर्देश पर ही इंद्रपुरी, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका एवं हस्तिनापुर, कलयुग में जगन्नाथपुरी आदि को भी बनाया। इसके अलावा पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज को भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था।

ऐसे में कारीगर, फर्नीचर बनाने वाले, मशीनरी और कारखानों से जुड़े लोग धूमधाम से भगवान विश्कर्मा की जयंती मनाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि साल 2023 में विश्वकर्मा पूजा का मुहूर्त...

विश्कर्मा पूजा 2023 मुहूर्त (Vishwakarma Jayanti 2023 auspicious time)
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इस साल 2023 में विश्वकर्मा पूजा के दिन 17 सितंबर को सुबह 07बजकर 50 मिनट से दोपहर 12बजकर 26 मिनट तक शुभ मुहूर्त है। इसके अलावा इसी दिन दोपहर 01.58 बजे से दोपहर 03.30 बजे तक का समय भी विश्कर्मा पूजा के लिए शुभ है।


विश्वकर्मा पूजा महत्व (Vishwakarma Puja Importance)

कहा गया है कि "विश्वं कृत्यस्नं वयापारो वा यस्य सः" यानि जिसकी सम्यक सृष्टि व्यापार है, वहीं विश्वकर्मा है। हमारे ऋषियों-मुनियों ने ही प्राचीन काल से ब्रम्हा-विष्णु और महेश के अलावा विश्कर्मा की पूजा-आराधना का भी प्रावधान किया हैं।

प्राचीन काल का सबसे पहला इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा को माना गया है। माना जाता है इस दिन औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े उपकर, औजार, की पूजा करने से कार्य की कुशलता में वृद्धि होती है। शिल्पकला का विकास होने के साथ ही कारोबार में बढ़ोत्तरी होती है इसके अलावा धन-धान्य और सुख-समृद्धि का भी आगमन जीवन में होता है।


ऐसे समझें भगवान विश्वकर्मा को ?(Know about Lord Vishwakarma ?)

माना जाता है कि भगवान नारायण ने ही सर्वप्रथम ब्रह्माजी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की। ऐसे में ब्रह्माजी के निर्देश पर ही विश्वकर्मा जी ने पुष्पक विमान, इंद्रपुरी, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका और हस्तिनापुर के पश्चाल कलयुग में जगन्नाथ पुरी आदि का निर्माण किया। इसके साथ ही यह भी माना जाता है कि वास्तु शास्त्र का ज्ञान, यंत्र निर्माण विद्या, विमान विद्या आदि के बारे में भगवान विश्कर्मा ने ही जानकारी प्रदान की है।

।। भगवान विश्वकर्मा की आरती ।। (Vishwakarma dev ki aarti)

1- ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ।।
2- आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया ।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ।।

3- ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई ।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई ।।

4- रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना ।।

5- जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।।

6- एकानन चतुरानन, पंचानन राजे
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे ।।

7- ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे ।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे ।।

8- श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे ।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।।
।। आरती समाप्त ।।