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शनि जयंती पर राशि अनुसार करें इन मंत्रों का जाप, ढैया, साढ़ेसाती की पीड़ा होगी कम

शनि जयंती (Shani Jayanti) 19 मई शुक्रवार को है। इस दिन विधिविधान से शनि देव की पूजा की जाएगी। मान्यता है कि शनि जयंती पर कर्मफलदाता शनि देव के प्रभावशाली मंत्रों का जाप करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैया की पीड़ा कम होगी। ऐसे व्यक्ति जिनकी कुंडली में शनि दोष हैं, वे राशि अनुसार मंत्रों का जाप कर इस पीड़ा से राहत पा सकते हैं। इसके अलावा शनि जयंती पूजा विधि और इस दिन क्या करें और क्या न करें, यह जानना भी जरूरी है।
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Pravin Pandey

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Updated: 18 May 2023, 7:37 PM IST

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शनि देव मंदिर में शनि जयंती पर पूजा करते समय कुछ बातों का रखना चाहिए ध्यान

शनि महामंत्र
ऊं निलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

शनि बीज मंत्र
ऊं प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

शनि रोग निवारण मंत्र
ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिहा।
कंकटी कलही चाउथ तुरंगी महिषी अजा।।
शनैर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्।
दुःखानि नाश्येन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखमं।।

राशि अनुसार शनि मंत्र
मेष: ऊं शांताय नम:
वृष: ऊं वरेण्णाय नम:
मिथुन: ऊं मंदाय नम:
कर्क: ऊं सुंदराय नम:


सिंह: ऊं सूर्यपुत्राय नम:
कन्या: ऊं महनीयगुणात्मने नम:
तुला: ऊं छायापुत्राय नम:
वृश्चिक: ऊं नीलवर्णाय नम:


धनु: ऊं घनसारविलेपाय नम:
मकर: ऊं शर्वाय नम:
कुंभ: ऊं महेशाय नम:
मीन: ऊं सुंदराय नम:

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शनि पूजा के दिन क्या करें और क्या न करें


1. प्रयागराज के आचार्य प्रदीप पाण्डेय के अनुसार मंदिर में शनि देव की पूजा करते समय इनके सामने से दीपक नहीं जलाना चाहिए। इसके बजाय किसी पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना चाहिए। इससे कर्मफलदाता शनि प्रसन्न होते हैं।
2. शनि देव की पूजा में लाल रंग या लाल रंग के फूल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके पीछे की वजह यह है कि लाल रंग मंगल का प्रिय रंग है और मंगल शनि के मित्र ग्रह नहीं हैं। शनिवार के दिन नीले या काले रंग का पूजा में प्रयोग करना चाहिए।
3. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का इस्तेमान नहीं करना चाहिए। क्योंकि तांबे का संबंध सूर्यदेव से है और सूर्यपुत्र होने के बावजूद शनि देव और सूर्य में करीबी नहीं है। शनि देव की पूजा में लोहे के बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए।


4. शनिदेव की पूजा मूर्ति के सीधे सामने खड़े होकर करने पर रोक है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उनकी कुदृष्टि पड़ सकती है, जिससे जीवन में कष्ट होता है। सूर्य पुत्र शनि की पूजा करते समय मूर्ति के दाईं या बाईं ओर खड़े होकर ही करना चाहिए।
5. आचार्य पाण्डेय के अनुसार अगर शनि मंदिर में शनि जयंती की पूजा कर रहे हैं तो इनकी आंखों में आंखें डालकर दर्शन न करें। यह भी मान्यता है कि शनि देव की मूर्ति की बजाय उनके शिलारूप का दर्शन करना चाहिए।
6. शनि जयंती की पूजा घर में कर रहे हैं तो पश्चिम दिशा की तरफ बैठ कर शनि देव का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करें, साथ ही ध्यान रखें की तेल इधर-उधर न गिरे।