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Independence Day special 2019 : छोटी उम्र में महान कार्य करने वाले भारत माता के वीर सपूत बने हमारे आदर्श, वीरों की वीर गाथा

Independence Day special 2019 : भारत को आजादी दिलाने के लिए सैकड़ों भारत माँ के वीर सपतों न अपने प्राणों का आहुति दी। उन्हीं वीर सपूतों में से कुछ थे जिन्हें युगों-युगों तक नहीं भुलाया जा सकता-

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भोपाल

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Shyam Kishor

Aug 14, 2019

Independence Day special 2019

Independence Day special 2019 : छोटी उम्र में महान कार्य करने वाले भारत माता के वीर सपूत बने हमारे आदर्श, वीरों की वीर गाथा

इस साल 2019 का स्वतंत्रता दिवस का महापर्व 15 अगस्त ( Independence Day special 2019 ) दिन गुरुवार को मनाएंगे। भारत को आजादी दिलाने के लिए सैकड़ों भारत माँ के वीर सपतों न अपने प्राणों का आहुति दी। उन्हीं वीर सपूतों में से कुछ थे जिन्हें युगों-युगों तक नहीं भुलाया जा सकता। जानें स्वतंत्रता दिवस पर वीरों की वीरगाथा।

स्वतंत्रता दिवस स्पेशल

1- मंगल पांडे- सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रदूत थे। क्रांति के समय और फांसी दिये जाने के समय इनकी उम्र 30 साल थी।

2- रानी लक्ष्मी बाई- 30 साल की उम्र में अंग्रेज़ो के खिलाफ क्रांति का नेतृत्व करने वाली अमर बलिदानी झांसी की रानी।

3- भगत सिंह- 23 वर्ष की अल्पायु में बलिदान। भगत सिंह भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। भगतसिंह ने देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है। इन्होंने केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। जिसके फलस्वरूप इन्हें 23 मार्च, 1931 को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फाँसी पर लटका दिया गया।

4- खुदीराम बोस- भारतीय स्वाधीनता के लिये मात्र 19 साल की उम्र में हिन्दुस्तान की आजादी के लिये फांसी पर चढ़ गये। मुज़फ्फरपुर जेल में जिस मजिस्ट्रेट ने उन्हें फांसी पर लटकाने का आदेश सुनाया था, उसने बाद में बताया कि खुदीराम बोस एक शेर के बच्चे की तरह निर्भीक होकर फांसी के तख़्ते की ओर बढ़ा था। जब खुदीराम शहीद हुए थे तब उनकी आयु 19 वर्ष थी। शहादत के बाद खुदीराम इतने लोकप्रिय हो गए कि बंगाल के जुलाहे उनके नाम की एक ख़ास किस्म की धोती बुनने लगे।

आजादी के दिवाने

5- करतार सिंह साराभा- 19 साल की उम्र मे लाहौर कांड के अग्रदूतों मे एक होने के कारण फांसी की सजा। देश के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान।

6- अशफाक़ उल्ला खां- 27 साल की उम्र मे देश के लिए प्राणो की आहुती देने वाले वीर हुतात्मा।

7- उधम सिंह- 14 साल की उम्र से लिए अपने प्रण को उन्होने 39 साल की उम्र मे पूरा किया और देश के लिए फांसी चढ़े। उन्होने जालियांवाला बाग हत्याकांड के उत्तरदायी जनरल डायर को लन्दन में जाकर गोली मारी और निर्दोष लोगों की हत्या का बदला लिया।

8- गणेश शंकर विद्यार्थी- 25 साल की उम्र से सक्रिय 40 साल की उम्र मे हिन्दुत्व की रक्षा के लिए बलिदान।

9- राजगुरु- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी थे। 23 साल की उम्र मे इन्हें भगत सिंह और सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फांसी पर लटका दिया गया था।

10- सुखदेव- 33 साल की अल्पायु मे 23 मार्च 1931 को इन्होंने भगत सिंह तथा सुखदेव के साथ लाहौर सेण्ट्रल जेल में फांसी के तख्ते पर झूल कर अपने नाम को हिन्दुस्तान के अमर शहीदों की सूची में अहमियत के साथ दर्ज करा दिया।

11- चन्द्रशेखर आजाद- 25 साल की उम्र मे बलिदान, चन्द्रशेखर आज़ाद ने वीरता की नई परिभाषा लिखी थी। उनके बलिदान के बाद उनके द्वारा प्रारम्भ किया गया आन्दोलन और तेज हो गया, उनसे प्रेरणा लेकर हजारों युवक स्वरतन्त्रता आन्दोलन में कूद पड़े। आजाद की शहादत के सोलह वर्षों बाद 15 अगस्त सन् 1947 को हिन्दुस्तान की आजादी का उनका सपना पूरा तो हुआ किन्तु वे उसे जीते जी देख न सके। आजाद अपने दल के सभी क्रान्तिकारियों में बड़े आदर की दृष्टि से देखे जाते थे। सभी उन्हें पण्डितजी ही कहकर सम्बोधित किया करते थे। वे सच्चे अर्थों में पण्डित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ के वास्तविक उत्तराधिकारी थे।

12- राम प्रसाद ‘बिस्मिल’- काकोरी कांड के क्रांतिकारी। 28 साल की उम्र मे काकोरी कांड से अंग्रेज़ सत्ता हो हिला के रख दिया और 30 साल की उम्र मे बलिदान।

13- स्वामी विवेकानंद- 39 साल का पूरा जीवन और 32 साल की उम्र मे पूरे विश्व मे हिन्दुत्व का डंका बजाने वाले निर्विवाद भारतीय महापुरुष।

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