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Motivational Speech: मोटिवेशनल स्पीकर्स की इन पांच बातों में छिपी है समस्याओं से निकलने की राह

आमलोग आजकल छोटी-छोटी बातों को लेकर परेशान हो जाते हैं, वो अपनी बात किसी से कह नहीं पाते और समस्याओं से निकलने की राह भी नहीं खोज पाते। ऐसे में समस्याओं और तनाव के कारण उनकी जिंदगी खुशनुमा नहीं बन पाती, ऐसे लोगों के लिए मोटिशनल स्पीकर्स की बातें उम्मीद बंधाती हैं और उन्हें समस्याओं से निकलने की राह दिखाती हैं।

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जया किशोरी और श्री श्री रविशंकर के मोटिवेशनल स्पीच और मोटिवेशनल कोट

इस चाहत को हावी होने देने से बचें

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का कहना है कि हमेशा आराम की चाहत आपको आलसी बना देती हैं और हमेशा पूर्णता की चाह में आप क्रोधित हो जाते हैं। हमेशा अमीर बनने की चाहत आपको लालची बना देती है। इसलिए इन अवस्थाओं से बचने में ही भलाई है।

खुशहाली का यह है रास्ता

मोटिवेशनल स्पीकर और कथावाचक जया किशोरी का कहना है कि अगर जिंदगी को खुशहाल बनाना चाहते हो तो अपने विचारों को चुनना सीखो।

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आपका हर पल महत्वपूर्ण है

जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि का कहना है कि जीवन का प्रत्येक पल महत्वपूर्ण और संभावनाओं से युक्त है, श्रम, शक्ति, समय और संसाधनों का उचित उपयोग कर स्वयं में समाहित अनंत सामर्थ्य, अपूर्व ऊर्जा और परम आनंद का अनुभव करें।


इसके अलावा स्वामी अवधेशानंद का कहना है कि हानि लाभ, जय पराजय, सुख दुख, मान अपमान द्वंद्व सब मन की उपज हैं और जीवन यात्रा के अस्थाई पड़ाव हैं। सत्संग, स्वाध्याय और महापुरुषों के सानिध्य में यथार्थ बोध कर जीवन की धन्यता को अनुबूत करें। नित्य अनित्य का विवेक, आत्म जागरण की तत्परता ही सत्संग का फलादेश है।


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प्रयत्न पर प्रकृति की सीमा भी कर सकते हैं पार

योगी सद्गुरु के अनुसार आप चाहे जहां हों, आप चाहे जो हों, अगर प्रयत्न करने के लिए तैयार हैं तो आप खुद को प्रकृति की सीमाओं से परे विकसित कर सकते हैं। उनका यह भी कहना है काम और जीवन के बीच संतुलन बनाने जैसी कोई चीज नहीं होती, सब कुछ जीवन ही है। संतुलन तो आपके भीतर होना चाहिए।


इसके अलावा सद्गुरु कहते हैं शरीर व्यक्तिगत है, मन व्यक्तिगत है, लेकिन चेतना व्यक्तिगत नहीं हो सकती है यह सर्व समावेशी है।