धर्म और अध्यात्म

नीम करोली बाबा के यह कहते जाग उठा मृत व्यक्ति

Neem karori baba ke chamatkar नीम करोली बाबा के चमत्कारों के किस्से देश दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इस पर भक्तों ने कई पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें बाबा रामदास की मिरेकल ऑफ लव, दादा मुखर्जी की उनकी कृपा से-एक भक्त की कहानी, रवि प्रकाश पांडेय की दिव्य वास्तविकता आदि हैं। इन पुस्तकों में बाबा नीम करोरी के चमत्कारों की ऐसी कहानियां हैं जो पढ़कर आपको हैरान कर देंगी, आइये बताते हैं महिला को पुनर्जीवन देने की एक कहानी..

3 min read
Jan 05, 2024
नीम करोली बाबा की चमत्कारिक कहानियां

Neem Karoli Baba Ke Chamatkar: एक भक्त के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एमईएस एसडीओ चंद्र शेखर पांडे की पत्नी को बुखार आ रहा था और वो कमजोर होती जा रहीं थीं, ऐसा लग रहा था कि वो बच नहीं पाएंगी। पांडे अपनी पत्नी को लेकर बहुत चिंतित थे। इधर, बिगड़ती तबीयत को देखकर उन्होंने अपने ससुर अनूपशहर के रहने वाले मोतीराम को तार भेजा।

इस खबर से बुजुर्ग मोतीराम बहुत परेशान हुए और अपने गुरु मौनी बाबा के पास गए और उनसे कहा, कि हे गुरुदेव, आज मैं आपसे विनती करता हूं, कि किसी भी तरह, मेरी बेटी को जीवन प्रदान करें, या मेरा जीवन समाप्त कर दें। मौनी बाबा कुछ देर तक ध्यान मुद्रा में रहे और फिर बोले, “केवल बाबा नीम करोली ही जीवन को बहाल करने में सक्षम हैं। तुम उनसे अपनी इच्छा पूरी करने के लिए प्रार्थना करो। इस पर अनूपशहर में मोतीराम बाबा का ध्यान करने लगे और उनसे प्रार्थना की।

ये भी पढ़ें

Neem Karoli Baba Mantra: नीम करोली बाबा ने बताए हैं धनवान बनने के तरीके, जानें बाबा की सलाह

अंगूर के रस से जीवित हो उठी मृत महिला


इधर, नीम करोली बाबा झांसी में चंद्र शेखर पांडे के घर पहुंचे और पूछा कि तुम्हारी पत्नी कैसी है? पांडे बाबा को नहीं पहचानते थे तो पूछा कि आप कौन हैं। इस पर बाबा ने उत्तर दिया, “बाबा नीम करोली। ” इस पर पांडे ने कहा, ''वह अंदर मृत पड़ी है, नीम करोली बाबा ने कहा, "क्या तुम उसे मुझे दिखाओगे?" इस पर चंद्र शेखर पांडे नीम करोली बाबा को भीतर ले गए। बाबा ने उसके शव को देखकर कहा, “यह अभी मरी नहीं है। क्या आपके घर में कुछ अंगूर हैं? उन्हें, और एक कटोरा और एक चम्मच ले आओ। बाबा ने अंगूरों को हाथ में दबाकर थोड़ा सा अंगूर का रस निकाला और उस रस को उसके मुंह में डाल दिया।


इसके बाद चंद्र शेखर पांडे की पत्नी की नाड़ी धड़कने लगी और कुछ ही क्षणों में उसने आंखें खोल दीं। बाबा ने कहा, "उसे अंगूर का रस और दूध पिलाओ, वह ठीक हो जाएगी।" इसके बाद नीम करोली बाबा चले गए। पांडे की पत्नी की तबीयत ठीक होने लगी और बिना किसी उपचार के वह फिर से स्वस्थ हो गईं। बाद में पता चला कि जब पांडे की पत्नी छह साल की थी तब बाबा मोतीराम के घर आए थे।


इसी समय पड़ोसी के घर में किसी की मृत्यु हो गई थी और बच्ची ने यह पहली बार देखा तो उसके कोमल हृदय को सदमा लग गया। इस समय नीम करोली बाबा ने छह साल की लड़की की कोमलता देख प्यार से कहा कि “तुम्हें जो मांगना है मांग लो।” उसने कहा कि "बाबा जब मैं मर जाऊं तो मुझे वापस जीवित कर देना।" बाबा अपनी बात पर कायम थे, लेकिन उन्होंने उस समय कुछ नहीं कहा और अब बाबा ने लड़की यानी चंद्र शेखर पांडे की पत्नी को दिया वचन अब निभाया था।

भोजन कराने वाले को दिया पुनर्जीवन

दादा मुखर्जी की पुस्तक उनकी कृपा से - एक भक्त की कहानी में भी इसी तरह का एक किस्सा है। इसके अनुसार महाराजजी को पास के एक गांव में जाने की आदत थी। एक शाम नीम करोली बाबा एक भक्त के घर आए जहां वह अक्सर भोजन करते थे। इस समय घर की मालकिन फूट-फूट कर रोती हुई बाहर आई और बोली, “जो तुम्हें खाना खिलाता था, वह वहीं पड़ा है।” वह मृत अवस्था में उन लोगों से घिरा हुआ था, जो उसके दाह संस्कार की व्यवस्था करने आए थे।

महाराज जी उस आदमी के पास बैठ गए, अपने कम्बल का एक हिस्सा उस आदमी के शरीर पर डाल दिया, और अपने आस-पास के लोगों से बात करने लगे। कुछ देर बाद महाराजजी उठे और कहा कि वह जाकर अपना भोजन कहीं और करेंगे। किसी ने भी उन्हें रोकने के बारे में नहीं सोचा। महाराज जी के चले जाने के बाद वह व्यक्ति नींद से उठ कर बैठा और बोला, “मैं यहाँ क्यों लेटा हूं?” हर कोई इतना चकित था कि कोई भी उत्तर नहीं दे सका।

ये भी पढ़ें

Baba Neem Karoli: हर मन्नत पूरी कर देंगे नीम करौली बाबा, यहां पढ़ें बाबा की विनय चालीसा

Also Read
View All

अगली खबर