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Parivartani Ekadashi: भूलकर भी न करें ये गलतियां, यह करें परिवर्तनी एकादशी पर दान और पढ़ें पद्मा एकादशी की प्रामाणिक कथा

Parivartani Ekadashi: सोमवार 25 सितंबर को परिवर्तनी एकादशी है, इस दिन व्रत, पूजा और दान से भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है। लेकिन इस दिन भूलकर भी कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए वर्ना भगवान नाराज हो जाते हैं। इसी के साथ इस दिन परिवर्तनी एकादशी की प्रामाणिक कथा जरूर पढ़नी चाहिए

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Pravin Pandey

Sep 24, 2023

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वामन अवतार कथा

यह करें परिवर्तनी एकादशी पर दान


वाराणसी के पुरोहित पं. शिवम तिवारी के अनुसार परिवर्तनी एकादशी यानी पद्मा एकादशी के दिन कुछ चीजों का दान बेहद शुभ माना जाता है। इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और दान करने वाले की हर मनोकामना पूरी करते हैं। इससे भक्त के जान-अनजाने किए गए पापों का नाश होता है और उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है तो आइये जानते हैं क्या दान करना चाहिए...


1. अन्न दानः पद्मा एकादशी के दिन अन्न दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे भक्त के घर अन्न की कमी नहीं होती और उस पर मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं।


2. पीले कपड़े का दान : पद्मा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। इसलिए इस दिन पीले कपड़े का दान करना शुभ फलदायक है और इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


3. धार्मिक पुस्तक का दानः पं. शिवम तिवारी के अनुसार परिवर्तनी एकादशी के दिन धार्मिक किताब का दान भगवान विष्णु को प्रसन्न करता है और इससे साधक के जीवन में आ रहीं परेशानियां दूर होती हैं।


4. मिठाई का दानः पद्मा एकादशी के दिन सफेद मिठाई का दान करना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे मानसिक तनाव से छुटकरा मिलता है और माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

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पं. शिवम तिवारी के अनुसार परिवर्तनी एकादशी के दिन कुछ गलतियां भगवान को नाराज कर सकती हैं, इसका गंभीर दुष्परिणाम होता है। यह गलती करने से बचना चाहिए।


1. एकादशी पर चावल नहीं खाना चाहिए, खास तौर से जिस घर में व्रत रखा जा रहा है। इसलिए यह गलती करने से बचना चाहिए।


2. एकादशी व्रत का पूरा शुभफल तभी मिलता है जब विचारों में सकारात्मकता हो, इसलिए एकादशी पर किसी का अपमान न करें, खास तौर पर बुजुर्गों, महिलाओं का सम्मान करें।


3. क्रोध और संयम का अभाव किसी भी व्रत के शुभ फल को कम कर देता है। इसलिए परिवर्तिनी एकादशी पर मन को शांत रखें ऐर विवाद की स्थिति वाली जगहों से दूर रहें।


4. परिवर्तनी एकादशी पर नाखून, बाल, दाढ़ी न कटवाएं, यह अशुभ माना जाता है। इस दिन का प्रयोग भगवान के ध्यान में करें.


5. भारत के किसी भी व्रत उपवास की पहली शर्त स्वच्छता है। पद्मा एकादशी पर श्रीहरि की पूजा के साथ मां लक्ष्मी की भी आराधना की जाती है और माता को गंदगी पसंद नहीं है। इसलिए परिवर्तिनी एकादशी पर साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।

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धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को इस एकादशी का महात्म्य बताया था। इसकी कथा भी सुनाई थी। उन्होंने कहा था कि त्रेतायुग में बलि नाम का असुर था लेकिन वह अत्यंत दानी,सत्यवादी और ब्राह्मणों की सेवा करने वाला था। वह सदैव यज्ञ, तप आदि किया करता था। इसके चलते उसका प्रभाव भी बढ़ रहा था, धीरे-धीरे राजा बलि ने स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। देवराज इन्द्र और देवता गण भयभीत होकर भगवान विष्णु के पास गए। उन्होंने रक्षा की प्रार्थना की।


इधर, बलि अपने को ताकतवर बनाने के लिए एक और यज्ञ कर रहा था। इस बीच मैंने (भगवान विष्णु ने) वामन रूप धारण किया और ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बलि के पास पहुंचा और दान मांगा। मैंने राजा बलि से याचना की कि- हे राजन! यदि तुम मुझे तीन पग भूमि दान दे दो। राजा बलि ने भूमि दान करने का संकल्प ले लिया। दान का संकल्प होने के बाद वामन (मैंने) ने विराट रूप धारण कर लिया और एक पग में पृथ्वी, दूसरे पांव की एड़ी से स्वर्ग और पंजे से ब्रह्मलोक को नाप लिया।

तीसरे पग के लिए राजा बलि के पास कुछ भी शेष नहीं था। इसलिए उन्होंने अपना सिर मेरे आगे कर दिया और वामन ने तीसरा पैर उनके सिर पर रख दिया। राजा बलि की वचन प्रतिबद्धता से प्रसन्न होकर भगवान वामन ने उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया।

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