
ramlila in indonesia
राम लीला का मंचन सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग भागों में बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी एशिया के लगभग सभी देशों में किसी न किसी रूप में रामलीला होती है। थाईलैंड, श्रीलंका और जापान में भी रामकथा का महत्व है।
त्रिनिदाद और टोबैगो
अंग्रेजी में भी खेली जाती है यहां रामलीला
१८५४ में प्रवासी भारतीयों ने यहां रामलीला की शुरुआत की। यहां हर साल रामलीला होती है। स्थानीय रुचि को बढ़ाने के लिए यहां लोग अंग्रेजी में भी रामलीला करते हैं, लेकिन जब जय श्री राम के नारे और दोहे-चौपाइयों की बारी आती है, तो कलाकार हिंदी में ही बोलते हैं।
सुरीनाम
डच प्रभाव दिखता है राम और सीता के नाम में भी
यहां हिंदू जनसंख्या काफी है। भले ही यहां की रामलीला में पात्रों के नाम थोड़े-से बदल जाते हों, लेकिन उत्साह में कोई कमी नहीं दिखती। डच प्रभाव की वजह से भगवान राम रामत्जांद्रे और सीता सियेता हो जाती हैं। हिंदी और डच के मिश्रण से आकर्षण बढ़ जाता है।
गुयाना
देश के हर हिस्से में इसे खेलने का प्रयास
इस देश की जनसंख्या में 40 प्रतिशत से अधिक भारतीय हैं। गुयाना धार्मिक सभा हर साल रामलीला का आयोजन धूमधाम से करती है। पिछले दस सालों में इसने देश के हर हिस्से में इसे पहुंचाने का प्रयास किया है।
मॉरीशस
झाल और ढोलक के संग रामलीला
मॉरीशस के कला और सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से हर साल यहां रामलीला करवाई जाती है। यहां रामलीला झाल और ढोलक के साथ गाई जाती है। यहां की मंडली इतनी मशहूर है कि उन्हें मंचन के लिए भारत भी बुलाया जाता है।
इंडोनेशिया
रामायण को संस्कृति मानते हैं
इंडोनेशिया के लोगों का मानना है कि इस्लाम जहां उनका धर्म है, वहीं रामायण उनकी संस्कृति। यहां के लोग जैवनिस वर्जन ऑफ रामायण को फॉलो करते हैं, जो 9वीं सदी में लिखी गई थी। यहां जावा में प्रंबनान मंदिर में सेंद्रातारी रामायण लगभग साल भर चलती है। यह रामकथा पर आधारित एक बैले डांस में नृत्य नाटिका है।
लाओस
थिएटर में भी दिखती है रामलीला
यहां भी वाल्मीकि रामायण का मंचन किया जाता है। गाने-बजाने के साथ डांस, पेटिंग और थिएटर भी इसमें देखने को मिलते हैं। लाओस का राष्ट्रीय महाकाव्य फरा लाख फरा राम है, जिसकी कहानी रामकथा से मिलती-जुलती है। इसका अधिकांश भाग भगवान बुद्ध पर आधारित है, पर हिंदू धर्म के कुछ देवताओं के भी वर्णन हैं।
थाईलैंड
रामगाथा है राष्ट्रीय महाकाव्य
इस देश का राष्ट्रीय महाकाव्य रामाकीन है, जिसका अर्थ राम की कीर्ति है। यह वाल्मीकि रामायण से लिया गया है और थाई भाषा में है। यहां के थिएटर ग्रुप में भी रामलीला भव्य तरीके से आयोजित होती है। थाईलैंड में छाया रामलीला होती है, जिसे नंग कहा जाता है। मुखौटा नाटक के माध्यम से प्रदर्शित की जाने वाली रामलीला को थाईलैंड में खौन कहते हैं।
कंबोडिया
रामायण सबसे प्रसिद्ध साहित्य
इस बौद्ध देश में हिंदू धर्म का प्रभाव है, क्योंकि यहां करीब 600 सालों तक हिंदू खमेर साम्राज्य का शासन था। यहां रामायण को रीमकर और भगवान राम को प्रिय रीम कहा जाता है। रीमकर यहां के खमेर साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध साहित्य रहा है। इसका प्रभाव कंबोडिया की कला में आज भी दिखाई देता है।
Published on:
28 Sept 2017 09:51 am
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