30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सोमवार को भगवान शिव के इस पाठ से पूर्ण होती है हर इच्छा, जानें क्या है मान्यता

Somwar Path: हिंदू शास्त्रों में भगवान शिव को सबसे भोले-भाले देव के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों से शीघ्र खुश होकर उन्हें मनचाहा वरदान देते हैं। ऐसे में सोमवार को भगवान शिव के इस पाठ को पढ़ने से शिव जी को प्रसन्न...

2 min read
Google source verification
shiv rudrashtakam path, rudrashtakam path karne ke fayde, lord shiva rudrashtakam, rudrashtakam path benefits, rudrashtakam path ke labh, bhagwan shiv ko kaise prasan kare, somwar ko kya karna chahie, how to please lord shiva, latest religious news, somwar upay,

सोमवार को भगवान शिव के इस पाठ से पूर्ण होती है हर इच्छा, जानें क्या है मान्यता

Shri Shiv Rudrashtakam: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार सोमवार के दिन भगवान शंकर की पूजा-पाठ को बहुत महत्व दिया गया है। माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ की यदि सच्चे मन से पूजा की जाए तो वे अपने भक्तों पर अपनी कृपा दृष्टि जरूर बरसाते हैं और उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। ऐसे में धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक यूं तो भोलेनाथ को मनाने के कई पाठ और मंत्रों का उल्लेख मिलता है परंतु रुद्राष्टकम का पाठ एक विशेष महत्व रखता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान भोलेनाथ की पूजा में आरती, शिव चालीसा, मंत्र के साथ ही यदि रुद्राष्टकम का पाठ किया जाए तो भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर आपकी हर इच्छा पूर्ण करते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि पाठ को स्पष्ट पढ़ना अनिवार्य है। तो आइए जानते हैं रुद्राष्टकम का पाठ क्या है...

श्री शिव रुरुद्राष्टकम

नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् ।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥

निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥

चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥

प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् ।
त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम् ॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥

रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।।

॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)

यह भी पढ़ें: ज्योतिष: पीली सरसों के दाने चमका सकते हैं आपकी किस्मत, इन उपायों से बनी रहती है मां लक्ष्मी की कृपा

Story Loader