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Som Pradosh Vrat: पंचक में वैशाख सोम प्रदोष की पूजा, इन वजहों से और भी हुआ फलदायी

भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित सोम प्रदोष व्रत (Som Pradosh Vrat) बेहद खास है। 17 अप्रैल को पंचक (Panchak) में ही सोम प्रदोष व्रत पर महाकाल की पूजा होगी। इसके अलावा इस दिन कई और वजह हैं, जिसके कारण सोम प्रदोष व्रत बेहद फलदायी हो गया है।

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Pravin Pandey

Apr 16, 2023

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Som Pradosh Vrat: वैसे तो हर प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रिय है, लेकिन सोमवार को भगवान शिव की पूजा के दिन यह व्रत पड़ता है तो खास हो जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। यह व्रत सभी भौतिक सुख प्रदान करने वाला और मोक्षदायी है। संतान प्राप्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए यह व्रत रखा जाता है।


इस बार सोम प्रदोष के दिन पंचक काल भी रहेगा। हालांकि यह भगवान की पूजा में बाधक नहीं रहता। वैसे भी महाकाल हर ग्रह नक्षत्र इस अशुभ घड़ी की बाधा को पार कर भगवान के चरणों में मन लगाने पर विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन इंद्र और ब्रह्म योग बन रहे हैं जो इस व्रत को विशेष फलदायी बना देते हैं। सोम प्रदोष व्रत से कुंडली में चंद्रमा समेत सभी ग्रह शुभ प्रभाव देते हैं। हर दोष दूर होता है, और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सोम प्रदोष व्रतः सोम प्रदोष तिथि की शुरुआत 17 अप्रैल दोपहर 3.46 बजे हो रही है, यह तिथि 18 अप्रैल दोपहर 1.27 बजे संपन्न हो रही है। सोम प्रदोष व्रत का मुहूर्त 17 अप्रैल 5.45 बजे से 7.20 बजे तक है। इस दिन इंद्र और ब्रह्म योग भी बन रहा है। इंद्र योग अगले दिन 18 अप्रैल 6.10 पीएम पर संपन्न हो रहा है और ब्रह्म योग 17 अप्रैल को 9.07 पीएम तक है।

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सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि (Som Pradosh Vrat Puja Vidhi)


1. सोम प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लें।
2. पूजास्थल पर जाकर बेलपत्र, अक्षत, धूप, दीप, जल, मिठाई आदि से शिवलिंग की पूजा करें।


3. पूरे दिन व्रत रखें, शाम को स्नान के बाद प्रदोषकाल में ऊँ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
4. प्रदोषकाल में शिवलिंग का अभिषेक करें, विधि विधान से पूजा करें और शिव चालीसा-शिव मंत्र का जाप करें।