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Vinayak Chaturthi Vaishakh: कब है वैशाख विनायक चतुर्थी, जान लें आरती और भद्रा का क्या है असर

शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi Vaishakh) और वरद विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखकर श्रीगणेश की पूजा अर्चना से विघ्ननाशक भक्त का हर संकट दूर करते हैं। आइये जानते हैं कब वैशाख विनायक चतुर्थी व्रत, गणेशजी की आरती क्या (Ganesh Aarti) है और इस दिन भद्राकाल का असर है या नहीं (Bhadra Kal effect)।

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Pravin Pandey

Apr 21, 2023

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Vaishakh Vinayak Chaturthi: वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत (दृक पंचांग) के अनुसार 23 अप्रैल 7.57 एएम से हो रही है, यह तिथि 24 अप्रैल 8.24 एएम पर संपन्न हो रही है। विनायक चतुर्थी की पूजा में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इस लिहाज से विनायक चतुर्थी व्रत 23 अप्रैल रविवार को होगा। मध्याह्न में विनायक चतुर्थी पूजा का समय 11.02 एएम से 1.36 पीएम के बीच होगा।

भद्रा का नहीं होगा असरः वैशाख की विनायक चतुर्थी के दिन 23 अप्रैल रात से 24 अप्रैल सुबह तक भद्रा भी लग रही है, लेकिन भद्रा का निवास स्वर्ग लोक में है तो यह धरती पर प्रभावी नहीं है। इसके अलावा पूजा पाठ के लिए किसी भी अशुभ काल का कोई महत्व नहीं होता।

विनायक चतुर्थी के दिन शुभ मुहूर्त


विनायक चतुर्थी के दिन सौभाग्य योगः सुबह 8.22 एएम तक
अभिजित मुहूर्तः 11.53 एएम से 12.45 पीएम
अमृतकालः 9.07 पीएम से 10.47 पीएम तक

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वरद विनायक चतुर्थी का महत्वः अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी विनायक चतुर्थी नाम से जानी जाती है, वैसे तो यह चतुर्थी हर महीने आती है, लेकिन सबसे प्रमुख विनायक चतुर्थी भाद्रपद महीने में आती है। इसे गणेश चतुर्थी नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश का जन्मदिन मनाया जाता है, इस दिन पूरी दुनिया में रहने वाले हिंदू उपवास रखकर पूजा पाठ करते हैं।


इसके अलावा विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान से किसी भी मनोकामना पूर्ति के आशीर्वाद को वरद कहते हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धालु विनायक चतुर्थी का उपवास रखते हैं, भगवान गणेश उसे ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं। यह भी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से भगवान गणेश उन्नति में सहायक होते हैं, और मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं।

मान्यता है कि इस व्रत से नौकरी और व्यापार में आ रही समस्या खत्म होती है, सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है। संतान की खुशहाली के लिए सूर्यास्त तक यह व्रत रखा जाता है। इससे सभी कष्ट दूर होते हैं। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, विद्या, धन और आरोग्य सबकुछ मिलता है।

गणेशजी की पूजा विधि

1. विनायक चतुर्थी के दिन सुबह स्नान ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लें। सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पूजा स्थल को गंगाजल से शुदध् करें।
2. शुभ मुहूर्त में में गणेशजी की पूजा करें उन्हें दूर्वा चढ़ाएं और 21 लड्डू का भोग लगाएं
3. गणेशजी की पूजा के समय उन्हें सिंदूर भी चढ़ाएं, इससे वे जल्द प्रसन्न हो जाते हैं।
4. गणेशजी की आरती करें, मान्यता है कि इससे पूजा में कोई कमी नहीं रह जाती।

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गणेशजी की आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।। जय गणेश..।।

एकदंत दयावंत चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी।। जय गणेश..।।
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करे सेवा।। जय गणेश..।।

अंधे को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।। जय गणेश..।।

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।। जय गणेश...।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।। जय गणेश..।।

गणेश मंत्र
1. श्रीवक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

2. ऊँ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये
वर्वर्द सर्वजन्म मे वषमान्य नमः।

3. ऊँ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि
तन्नो दंति प्रचोदयात्।।