
सावन के महीने में भोलेनाथ के इन मंदिरों में उमड़ पड़ता है भक्तों का हुजूम, जानें कौन से हैं शिव के प्रसिद्ध मंदिर
हिंदू कैलेंडर के अनुसार पांचवा महीना श्रावण माह होता है। भगवान शिव को समर्पित यह महीना बहुत पावन माना जाता है। यूं तो सावन के पूरे महीने में मंदिरों में भोलेनाथ की पूजा तथा अनुष्ठान किए जाते हैं, परंतु सावन के सोमवार के दिन व्रत और पूजा का खास विधान बताया गया है। इस साल 2022 में सावन का महिना 14 जुलाई से शुरू होगा। श्रावण मास में शिव जी के मंदिरों में पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में कुछ ऐसे प्रसिद्ध मंदिर है जहां सावन के महीने में शिव भक्तों की खास भीड़ होती है...
1. काशी विश्वनाथ मंदिर
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में स्थित है। यह हिंदुओं का एक प्रसिद्ध मंदिर है। जिस प्रकार पवित्र गंगा नदी में स्नान को महत्व दिया गया है, उसी प्रकार मान्यता है कि जीवन में एक बार इस मंदिर के दर्शन कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।
2. पशुपतिनाथ मंदिर
भारत में मध्य प्रदेश राज्य के मंदसौर जिले में स्थित यह मंदिर पूरे विश्व में अपनी अद्वितीय मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहां विराजमान प्रतिमा में अलग अलग मुद्रा में आठ मुख हैं। पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर जिले में शिवना नदी के किनारे पर स्थित है। इस मंदिर में शिव भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर की प्रतिमा को बहुत ही खूबसूरती से एक ही पत्थर पर निर्मित किया गया है।
3. महाकालेश्वर मंदिर
महाकालेश्वर मंदिर भी 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस मंदिर का कई पुराणों में विस्तार से स्पष्ट वर्णन मिलता है। यह मंदिर भारत के उज्जैन में स्थित है। इस मंदिर में शिव जी को मूर्ति दक्षिण मुखी है। साथ ही महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में ओंकारेश्वर शिव की प्रतिमा भी प्रतिष्ठित है।
4. लिंगराज मंदिर
इस मंदिर में भी सावन महीने में भक्तों की जमकर भीड़ होती है। लिंगराज मंदिर भारत में ओडिशा प्रांत के भुनेश्वर में स्थित है। यह इस शहर के सबसे पुराने और मान्यता प्राप्त मंदिरों में से एक है। लिंगराज मंदिर भगवान त्रिभुवनेश्वर को समर्पित माना जाता है।
5. सोमनाथ मंदिर
भारत के गुजरात में इस ऐतिहासिक शिव मंदिर का गुणगान दूर दूर तक किया जाता है। भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से गुजरात के सोमनाथ मंदिर को सबसे पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। माना जाता है कि स्वयं चंद्र देव ने इस मंदिर का निर्माण किया था।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)
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Published on:
11 Jun 2022 03:29 pm

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