
प्रतिपदा नंदा संज्ञक तिथि सायं ६.३२ तक, इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। शुक्ल प्रतिपदा में शुभ व मांगलिक कार्य शुभ नहीं कहे गए हैं। अभी मलमास दोष है। विवाहादि मांगलिक कार्य वर्जित हैं। नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद ‘ध्रुव व ऊध्र्वमुख’ संज्ञक नक्षत्र रात्रि ८.१० तक, फिर रेवती ‘मृदु व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में यथा आवश्यक यदि समय और तिथ्यादि शुद्ध व शुभ हो तो विवाह, यज्ञोपवीत, देवस्थापन, वास्तु और अभिषेक आदि विषयक कार्य और रेवती नक्षत्र में वास्तु, देवमन्दिर, अलंकार व विवाहादि कार्य शुभ होते हैं। पर अभी समय शुद्ध नहीं है। चंद्रमा: सम्पूर्ण दिवारात्रि मीन में है। २०७५, संवत्सर: विरोधकृत, अयन: उत्तरायण, शाके: १९३९, हिजरी: १४३९, मु.मास: जमादि-उलसानि-२९, ऋतु: बसंत, मास: चैत्र, पक्ष: शुक्ल।

श्रेष्ठ चौघडि़ए :आज प्रात: ८.२९ से दोपहर १२.४१ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा दोपहर बाद २.०५ से अपराह्न ३.२९ तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर १२.१८ से दोपहर १.०३ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं। राहुकाल :सायं ४.३० बजे से सायं ६.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभ कार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

घटस्थापना का मुहूर्त: इस वर्ष आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार को सूर्योदय प्रात: ६.३७ पर होगा और द्विस्वभाव मीन लग्न प्रात: ७.५६ तक है। इस प्रकार प्रात: ६.३७ से प्रात: ७.५६ तक घटस्थापना कर नवरात्रा प्रारम्भ करने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। इसके अतिरिक्त अभिजित मुहूर्त दोपहर १२.११ से दोपहर १२.५९ तक भी घटस्थापना की जा सकती है। चौघडिय़ों के हिसाब से घटस्थापना करने वाले प्रात: ८.०७ से दोपहर १२.३५ तक चर लाभ व अमृत के चौघडिय़ों में भी घटस्थापना कर सकते हैं। घटस्थापना के लिए प्रात:काल का समय ही श्रेष्ठ बताया गया है।