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अकाल मृत्यु के भय से छुटकारा दिला सकते हैं ये उपाय, बरसती है सूर्य देव और यम की खास कृपा

Astrology: यमराज का नाम सुनते ही लोगों के मन में सबसे पहला ख्याल मृत्यु का आता है। माना जाता है कि यमराज के पिता सूर्य देव की कृपा जिस व्यक्ति पर होती है उसे अकाल मृत्यु या यम की यातनाओं का डर नहीं होता।

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अकाल मृत्यु के भय से छुटकारा दिला सकते हैं ये उपाय, बरसती है सूर्य देव और यम की खास कृपा

यमराज को मृत्यु का देवता कहा जाता है। यमदेव का नाम सुनते ही लोगों के मन में एक सिहरन सी उठ जाती है। वहीं प्राचीन ग्रंथों में भी यमराज की एक बहुत भयानक छवि वर्णित है। कहा जाता है कि यम के दूतों को ना दूसरों का दर्द दिखाई देता है ना सुनाई देता है। साथ ही मृत्यु के नजदीक आने पर व्यक्ति को यम के दूत दिखाई देने लगते हैं जिससे व्यक्ति बुरी तरह कांप उठता है। और जब आत्मा के शरीर त्याग देने पर ये ही यम के दूत तरह-तरह की यातनाएं देते हुए आत्मा को यमपुरी तक ले जाते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र में यह भी कहा गया है कि जिस व्यक्ति पर मृत्यु के देवता यमराज के पिता सूर्य देव की कृपा होती है उसे अकाल मृत्यु और यम की यातनाओं का भय नहीं सताता। तो आइए जानते हैं जीवन के उद्धार के लिए भविष्य पुराण में सूर्य और यमदेव को खुश करने के कौन से उपाय बताए गए हैं...

शास्त्रों में प्रातः काल सूर्य देव को जल चढ़ाने का बड़ा महत्व बताया गया है। माना जाता है कि जो व्यक्ति सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके भगवान सूर्य नारायण को जल अर्पित करता है उसके जीवन में आत्मविश्वास, साहस, तेज, यश, सकारात्मकता और सुखों की वृद्धि होती है। बता दें कि तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें कुमकुम, अक्षत, लाल रंग की पुष्प डालकर जल अर्पण करना शुभ माना जाता है।

यमदूत के डर से मुक्ति पाने के लिए सूर्य मंत्रों का प्रतिदिन जाप सबसे सरल उपाय बताया गया है। सूर्य देव के मंत्र- ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।। का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।

अपने साथ-साथ अपनी पीढ़ियों के उद्धार के लिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य मंदिर में झाड़ू-पोछा लगाना यानी सफाई करना फलदायी माना जाता है।

यम देव की छत्रछाया पाने के लिए भगवान सूर्य देव को दूध और घी चढ़ाना भी लाभकारी माना गया है।

अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए हर महीने की अमावस्या को सभी परिवारीजनों के साथ मिलकर गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना शुभ होता है। साथ ही ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक पाठ के समाप्त होने पर सूर्य देव को अर्घ्य देने का भी विधान है। इस दौरान परिवार के लोगों द्वारा बेहतर स्वास्थ्य के साथ ही दीर्घायु की कामना की जाती है।

इसके अलावा, अमावस्या के दिन ही गरीब अथवा जरूरतमंद बच्चों को भोजन और मीठा हलवा खिलाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।)

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