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Jaya Ekadashi 2023: जया एकादशी व्रत से पहले ये जानना जरूरी, व्रत के यह हैं नियम

Jaya Ekadashi 2023: फरवरी महीने की पहली तारीख को माघ शुक्ल पक्ष एकादशी यानी जया एकादशी (Jaya Ekadashi 2023) पड़ रही है। यह व्रत भगवान विष्णु की पूजा और उपासना के लिए समर्पित है। इस जया एकादशी व्रत (Jaya Ekadashi vrat)से पहले इन नियमों को जानना जरूरी है।

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Pravin Pandey

Jan 31, 2023

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jaya ekadashi vrat

Jaya Ekadashi 2023: पुरोहितों का कहना है कि एकादशी व्रत रखने वाले लोग यदि इन नियमों (Jaya Ekadashi vrat) का ध्यान नहीं रखते तो उनको पूरा फल नहीं मिलता। इसलिए जया एकादशी व्रत से पहले यह नियम (rules of Jaya Ekadashi) जान लीजिए।


1. एकादशी के दिन स्नान के बाद मंदिर जाकर पुराण और सत्य नारायण कथा का पाठ करें।
2. एकादशी के दिन लकड़ी के दातुन और पेस्ट का उपयोग न करें। नींबू, जामुन और आम के पत्ते लेकर चबा लें और अंगुली से कंठ शुद्ध कर लें।


3. इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को संकल्प लेना चाहिए कि वह चोर, पाखंडी, दुराचारी व्यक्ति से बात नहीं करेगा, किसी का दिल नहीं दुखाएगा। गौ और ब्राह्मण को फलाहार अन्न आदि देकर प्रसन्न करेगा। रात्रि जागरण कर कीर्तन करेगा। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करेगा, राम, कृष्ण, नारायण समेत विष्णुसहस्त्रनाम का वह जाप करेगा। ऐसी प्रतिज्ञा के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करे कि हे त्रिलोकपति मेरी लाज आपके हाथ में है, अतः मुझे इस संकल्प को पूरा करने की शक्ति प्रदान करे।


4. एकादशी के दिन वृक्ष से पत्ता तोड़ना जरूरी है, इसलिए पहले ही तोड़े गए पत्ते या गिरे हुए पत्ते का आज के दिन इस्तेमाल करें।
5. ब्रह्मचर्य का पालन करें, भोग विलास से दूर रहें। जुआ, निद्रा, चुगली, निन्दा, चोरी, हिंसा, क्रोध, झूठ, कपट आदि कुकर्मों से दूर रहना चाहिए।

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6. व्रत रखने वाले व्यक्ति को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग का सेवन नहीं करना चाहिए।
7. व्रत के तीन दिनों दशमी, एकादशी और द्वादशी को कांसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, चावल, मसूर, उड़द, चने, शाक, शहद, तेल और अधिक जल का सेवन न करें।
8. व्रत के पहले दिन (दशमी) और दूसरे दिन (द्वादशी) को हविष्यान्न (जौ, गेहूं, मूंग, सेंधा नमक, काली मिर्च, शक्कर, गाय का घी) का एक बार भोजन करें।


9. एकादशी के दिन घर में स्वयं झाड़ू न लगाएं, इससे चींटी आदि को नुकसान पहुंचता है।
10. यथाशक्ति अन्न दान करें, किसी से इस दिन दान न लें।
11. इस व्रत में मौन व्रत, जप, शास्त्र पठन, कीर्तन, रात्रि जागरण लाभदायक होता है। इसलिए अधिक से अधिक समय मौन रहें, कब बोलें और बोलें तो मधुर बोलें।

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