
द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि रात्रि ८.०५ तक, तदुरान्त त्रयोदशी जया संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। द्वादशी तिथि में यथा आवश्यक सभी चर व स्थिर कार्य, विवाहादि मांगलिक कार्य और अलंकारादिक कार्य करने योग्य हैं। पर तेल लगाना व यात्रा वर्जित है। त्रयोदशी में जनेऊ को छोडक़र साहसिक कार्य, यात्रा व प्रवेशादि कार्य प्रशस्त हैं। नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा ‘उग्र व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र रात्रि २.०४ तक, इसके बाद उत्तराषाढ़ा ‘ध्रुव व ऊध्र्वमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में कुआ, बावरी, कृषि, विग्रह, कठिन व साहसिक कार्य व पेड़ काटना आदि कार्य प्रशस्त हैं। उ. षाढ़ा नक्षत्र में विवाहादि मांगलिक कार्य शुभ कहे गए हैं। योग: वज्र नामक नैसर्गिक अशुभ योग दोपहर बाद १.४० तक, इसके बाद सिद्धि नामक नैसर्गिक शुभ योग है। वज्र नामक योग की प्रथम तीन घटी शुभ कार्यों में त्याग देना चाहिए। करण: तैतिल नाम करण रात्रि ८.०५ तक, तदुपरान्त गरादिक करण रहेंगे।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से प्रात: ८.३३ तक अमृत, प्रात: ९.५५ से पूर्वाह्न ११.१८ तक शुभ तथा दोपहर बाद २.०४ से सूर्यास्त तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर १२.१९ से दोपहर १.०३ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभ कार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं। शुभ मुहूर्त: उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज उपनयन का अशुद्ध (तिथि त्याज्य), विद्यारम्भ व कूपारम्भ के पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में तथा विवाह का अशुद्ध (संक्रान्ति दिन दोषयुक्त) मुहूर्त उ.षा. नक्षत्र में है।

व्रतोत्सव: आज भगवान भुवन भास्कर अंतरात्रि २.४८ पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। कुंभ की संक्रांति ४५ मु. है। संक्रांति पुण्यकाल अगले दिन है। चन्द्रमा: चन्द्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि धनु राशि में है। दिशाशूल: सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। पर आज धनु राशि के चन्द्रमा का वास पूर्व दिशा की यात्रा में सम्मुख रहेगा। यात्रा में सम्मुख चन्द्रमा धनलाभ कराने वाला माना गया है। राहुकाल: प्रात: ७.३० से ९.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।