
तृतीया जया संज्ञक तिथि सायं ४.५१ तक, इसके बाद चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि है। तृतीया तिथि में अन्नप्राशन, गानविद्या, सीमन्त कर्म, चित्रकारी, युद्ध, शस्त्रादि कार्य, यात्रा, उत्सव, व्यापार सिद्ध, घर सम्बंधी और औषधादि के कार्य सफल होते हैं। चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि में शुभ कार्य वज्र्य है। नक्षत्र: अश्विनी ‘क्षिप्र व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र सायं ७.४४ तक, इसके बाद भरणी ‘उग्र व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। अश्विनी गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र भी है। अत: अश्विनी नक्षत्र में जन्मे जातकों की गण्डमूल शांति करा लेना जातकों के हित में होगा। अश्विनी नक्षत्र में वैसे यात्रा, दवा, अलंकार, चित्रकारी, कलादि और विवाह से सम्बंधित अन्य कार्य शुभ होते हैं। भरणी नक्षत्र में साहस, दारूण, शत्रुवध, कुआ-बावड़ी आदि के कार्य सिद्ध होते हैं।

योग: ऐन्द्र नामक योग अपराह्न ३.४१ तक, तदन्तर वैधृति नामक योग है। दोनों नैसर्गिक अशुभ योग है। पर वैधृति नामक योग की समस्त घटियां शुभ व मांगलिक कार्यों में वर्जनीय हैं। विशिष्ट योग: सूर्योदय से सायं ७.४४ तक अमृत सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग। इसके बाद रवियोग नामक शुभ योग प्रारम्भ हो जाएगा। करण: गर नामकरण सायं ४.५१ तक, इसके बाद रात्रि ४.१० तक वणिज नामकरण है। तदुपरान्त भद्रा प्रारम्भ हो जाएगी। श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज प्रात: ९.३५ से दोपहर बाद २.०४ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा अपराह्न ३.३४ से सायं ५.०४ तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर १२.१० से दोपहर १२.५८ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभ कार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं। राहुकाल: अपराह्न ३.०० से सायं ४.३० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

शुभ मुहूर्त: आज विवाह रेवती नक्षत्र में व विवाह कात्यायनोक्त अश्विनी नक्षत्र में तथा व्रतबंध प्रसूतिस्नान, सगाई-रोका, विवाह (लग्नाभाव दोषयुक्त) और हलप्रवहण आदि के रेवती नक्षत्र में यथा आवश्यक शुभ मुहूर्त हैं। व्रतोत्सव: आज गणगौर पूजन, मेला गणगौर प्रारंभ जयपुर (राज.), गौरी तृतीया, मनोरथ तृतीया व्रत, मत्स्य जयंती, मेवाड़ उत्सव शुरू (उदयपुर राज.), मन्वादि, आंदोलन तृतीया (बिहार), गंडमूल सायं ७.४४ तक, सूर्यदेव सायन मेष में प्रवेश रात्रि ९.४५ पर, सूर्य उत्तर गोल में प्रवेश तथा बसन्त सम्पात्, महाविषुव दिन व तीसरा नवरात्रा है। चन्द्रमा: चन्द्रमा मेष राशि में संपूर्ण दिवारात्रि। दिशाशूल: मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज पूर्व दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है।