2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लाखों की नौकरी छोड़ पहले ही प्रयास में IAS बनने का सपना किया पूरा : यहां पढ़ें

Motivational Story

2 min read
Google source verification
Motivational Story

Motivational Story

Shivansh Awasthi Success Story : यूपीएससी सिविल सेवा के नतीजे जारी होने के बाद टॉपर्स का इंटरव्यू लिया जाना स्वाभाविक है। लेकिन कुछ उदाहरण ऐसे भी होते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनते हैं। बहुत से ऐसे भी अभ्यर्थी है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करके ये मुकाम हासिल किया है। ऐसी ही प्रेरणा देने वाली कहानी है कानपुर के रहने वाले शिवांश अवस्थी की जिन्होंने ऑल इंडिया में 77वीं रैंक हासिल की है। शिवांश ने IIT Kanpur से ऐरोस्पेस इंजिनियरिंग की पढ़ाई की इसके बाद जापान की मित्शुबीशी कंपनी में 40 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर नौकरी का ऑफर मिला। नौकरी भी बहुत अच्छी थी और वेतन भी अच्छा था। इसलिए उन्होंने जॉइन करने का फैसला लिया लेकिन विदेश जाने के लिए पासपोर्ट बनवाने के दौरान उन्हें बहुत दिक्कतें आईं, दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े और एक बार तो उनका पासपोर्ट रोक दिया गया। शिवांश के पिता शैलेश अवस्थी पत्रकार रहे हैं, जिसके चलते उनका काम तो आखिर बन गया लेकिन यह घटना उनके दिमाग में घर कर गई। शिवांश को अहसास हुआ कि आम इंसान को इन छोटे-छोटे कामों के लिए कैसे एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है। इसके बाद ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में आकर सिस्टम में बदलाव लाने की ठानी और तैयारी में जुट गए।

शिवांश अवस्थी जापान में नौकरी करते हुए अपने देश में रहकर देश सेवा का सपना बनाए रखा। जापान में लगभग 3 साल नौकरी करने के बाद शिवांश उसे छोड़कर वापस भारत आ गए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना पूरा करने में जुट गए। दिल्ली में रहकर सिविल सर्विसेज के लिए पढ़ाई की और पहले ही प्रयास में 77वीं रैंक के साथ सफल हो गए। शिवांश ने सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया। उन्होंने बताया कि जब वह पढ़ाई करते थे तो उनकी मां पूरी रात ठीक से सो नहीं पाती थी कि कहीं उन्हें किसी चीज की जरूरत न पड़ जाए। शिवांश ने साइंस बैकग्राउंड से होते हुए भी ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में जिऑग्रफी को चुना। शिवांश शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे थे। उनकी स्कूली शिक्षा कानपुर से हुई। हाई स्कूल में उन्हें 95 और इंटरमीडिएट में 92 प्रतिशत अंक मिले थे।

Motivational Story

युवा पीढ़ी को वो दबाव के तौर पर कुछ नहीं कहना चाहते। उनके हिसाब से टाइम टेबल बनाकर पढ़ना और उसे स्ट्रिक्टली फॉलो करना जरूरी है। रोजाना न्यूज पेपर जरूर पढ़ते हैं क्योंकि इससे काफी हेल्प मिली। इंटरव्यू के दौरान वह ईमानदारी से और शांति के साथ सवालों के जवाब देने की सलाह देते हैं। उन्होंने बताया कि आप कैसे जवाब देते हैं से ज्यादा मायने रखता है कि क्या जवाब देते हैं। UPSC परीक्षा पास करना मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं। हर वर्ष देखा जाता है बहुत से कैंडिडेट ऐसे होते हैं जिनकी आर्थिक स्तर बहुत कमजोर होने के बावजूद भी वे सफल होते हैं। पढ़ाई न करने के लिए बहाने बहुत है और पढ़ाई करने वाले के पास न कोई बहाना है और न ही समय की कमी। इस बार एक ऐसे उदहारण और हैं जिन्होंने लाखों की नौकरी छोड़ UPSC को चुना। गुरुग्राम के बेटे फैसल खान ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में 546वीं रैंक हासिल की है। तीसरे प्रयास में फैसल ने यह सफलता हासिल की है। पिछली बार वह इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन सफल नहीं हो पाए थे। 17 लाख पैकेज की नौकरी को छोड़ना आसान नहीं था। लेकिन पिता और मां कुलसुम ने नौकरी ज्वॉइन करने के बजाय तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही बहन फिजा ने तनाव कम करने में मदद की। आखिर उन्हें सफलता हासिल हुई।