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130 एकड़ के ऐतिहासिक मलकपुर तालाब में भू-माफियाओं का कब्जा

रीवा. जिले के ऐतिहासिक मलकपुर तालाब पर जमीन कारोबारियों ने कब्जा जमा रखा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी प्रशासन अभी तक में अतिक्रमण हटाने के लिए दल तक का गठन नहीं कर सका है। मनगवां के इस मलकपुर तालाब में एक तरफ प्रशासन ने बिल्डिंग दर बिल्डिंग का निर्माण कराकर वजूद को खत्म किया तो दूसरी तरफ अतिक्रमणकारियों ने चारों तरफ से तालाब को घेर रखा है, जिससे इसका पूरा अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

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Land mafia in possession of 130 acres of Malkapur pond

Land mafia in possession of 130 acres of Malkapur pond

प्रदेश के भोपाल तालाब के बाद दूसरे सबसे बड़े ऐतिहासिक 130 एकड़ के मलकपुर तालाब को बचाने के लिए प्रशासन आगे नहीं आ रहा है। तालाब के चारों तरफ सैकड़ाभर अतिक्रमणकारियों द्वारा कच्चे एवं पक्के निर्माण कर लिए हैं। आलम यह है कि तालाब के चारों तरफ सिर्फ निर्माण कार्य दिख रहा है। मलकपुर तालाब को बचाने के लिए 9 फरवरी 2012 को श्याम नंदन मिश्रा पिता कन्हैया लाल मिश्रा निवासी बेला द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी। उन्होंने मांग की थी कि तालाब के स्वरूप को ना बिगाड़ा जाए। जो सरकारी भवन बनकर तैयार हो गए हैं उनके अंशदान से तालाब के शेष बचे भाग को नया रूप दिया जाए अन्यथा दूसरे तालाब की खुदाई कराई जाए।

मामला आज भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। उधर प्रशासन द्वारा जनहित याचिका लगने के बाद भी जमीनों का विभाजन कर दिया गया। साथ ही प्रतिदिन अतिक्रमणकारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिससे अब सिर्फ 91 एकड़ ही तालाब बचा है। खसरे के अनुसार चार कार्यालयों को जमीन आवंटित की गई है। शेष कार्यालयों को जमीन अभी विभाजन नहीं किया गया। अभी हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा फिर तालाबों के संरक्षण के लिए निर्देश जारी किया है और जल्द अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कलेक्टर को डेड लाइन जारी की है, देखना है कि जिला प्रशासन क्या निर्णय लेता है।

मलकपुर तालाब में ये संस्थान बने
मलकपुर तालाब की जमीन पर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान 11 एकड़ 11 डिसमिल, कृषि उपज मंडी 5 एकड़ 6 डिसमिल, शासकीय नवीन महाविद्यालय 3 एकड़ 55 डिसमिल एवं श्मशान घाट 1 एकड़ 1 डिसमिल जमीन आवंटित की गई है। लेकिन इनके अलावा तालाब की जमीन पर नगर पंचायत, मांगलिक भवन, सिविल अस्पताल, तहसील कार्यालय, न्यायालय भवन आदि भवन भी बन गए हैं। हाईकोर्ट में दायर याचिका को दरकिनार करते हुए तालाब की जमीन के बंटवारे कर दिए गए।

100 वर्ष पुराना तालाब, कभी सूखा नहीं
मनगवां के ऐतिहासिक मलकपुर तालाब की खासियत यह है कि 100 वर्ष पुराने इस तालाब का पानी कभी नहीं सूखा। तालाब में निरंतर पानी भरा रहता है। वर्ष 1964, 1965 एवं 1966 जब भीषण अकाल पड़ा था तभी तालाब में पानी था। लेकिन वर्तमान में इस तालाब के पानी को मापना बहुत कठिनाई भरा है।

किबदंती, ऐसे हुआ तालाब का निर्माण
पुराने बुजुर्ग बताते हैं कि जमुना नदी एवं नर्मदा नदी के बीच गोंड राजाओं का शासन हुआ करता था। उनकी राजधानी मंडला रही। जहां की गोंड़ रानी मलकावती अपने पति को इलाज के लिए बनारस जा रही थी। रात में उसने मनगवां के समीप फुलचिहैन बगीचे में रात्रि पड़ाव डाला। रानी जहां विश्राम कर रही थी उसके बगल में सर्प की बामी से आवाज आई कि राजा को राई और म_ा पिला दो इनका जालंधर दूर हो जाएगा और बामी में कराही का गर्म तेल डाल दो सोना निकलेगा। रानी ने ऐसा ही किया तो उनकों अपार सोना मिला। जिससे रानी ने तालाब की खुदाई कराई और रानी मलकावती के नाम पर ही मलकपुर नाम पड़ा था।

चिह्नित किए गए थे 113 अतिक्रमणकारी
तत्कालीन कलेक्टर जेपी श्रीवास्तव ने मलकपुर तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए दल गठित किया था। जिसके बाद तालाब पर बने मकानों को चिन्हित करके 113 अतिक्रमणकारियों को चिह्नित कर नोटिस भी जारी की गई थी। लेकिन उनके स्थानांतरण होते ही यह बात ठंडे बस्ते में चली गई। ऐतिहासिक मलकपुर तालाब अतिक्रमण मुक्त कराकर सौंदर्यीकरण कराए जाने की आवश्यकता है।

वर्जन
जल्द ही कमेटी गठित कर मलकपुर तालाब के अतिक्रमणकारियों को चिह्नित किया जाएगा एवं तालाब को अतिक्रमण मुफ्त किया जाएगा।
मनोज पुष्प, कलेक्टर रीवा