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राम नवमीं की तारीख को लेकर उलझन, जानिए तिथि के अनुसार किस नक्षत्र में मनेगा भगवान का जन्मोत्सव

रवियोग और पुनर्वसु नक्षत्र में मनेगी रामनवमी

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navratra durga

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सागर. रामनवमीं का पर्व 25 मार्च को पुनर्वसु नक्षत्र में रवि योग में मनाया जाएगा। इस अवसर पर मंदिरों में भगवान श्रीराम का प्राकट्य उत्सव मनाया जाएगा। शहर के बड़ा स्थित रामबाग मंदिर , रामपुरा राम मंदिर और राम दरबार में तैयारियां चल रही हैं। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र, कर्क लग्न, अभिजित मुहूर्त में सूर्यवंश में राजा दशरथ के यहां भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ था।

इस बार रामनवमीं पर रविवार को यह योग दोपहर 2.20 बजे से प्रारंभ हो रहा है। चैत्र मास की प्रतिपदा से लेकर नवमीं तक नवरात्रि मनाई जाती है। जैसा कि नाम से ही विदित है कि नवरात्रि? यानी नौ दिनों तक दुर्गा मां, सरस्वती और लक्ष्मी माता के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। नौ दिन के चैत्र नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन रामनवमीं है। यह त्योहार चैत्र शुक्ल की नवमीं को मनाया जाता है। राम जन्म की खुशी में लोग रामनवमीं पर्व मनाते हैं। इस दिन कई लोग उपवास भी रखते हैं। रामायण का पाठ करते हैं। भगवान राम की मूर्ति को पालने में झुलाते हैं। इसके अलावा शहर के मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजना किया जा रहा है।


कल कुल देवी की पूजा भी होगी


अष्टमी और नवमी तिथि साथ-साथ होने से असमंजस भी बन रहा है। बुंदेलखंड में महाष्टमी और नवमीं पर कुल देवी की पूजा होती है। पं. शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार रविवार को अष्टमी और नवमीं पूजन एक ही दिन किया जा सकता है लेकिन जिन लोगों ने जवारे लगाए हैं, उनको अष्टमी ही माननी चाहिए। सोमवार को नवमीं पूजन करना चाहिए और जवारे विसर्जन भी सोमवार को ही होंगे। साथ ही व्रत का पारण सभी को जवारे विसर्जन के बाद सोमवार को ही करना चाहिए ।


पूजा मुहूर्त


सुबह 11.14 बजे से
दोपहर 13.41 बजे तक
मध्याह्न समय :
दोपहर 12.27 बजे से