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बंदियों को आशीष देने केंद्रीय जेल पहुंचे आचार्य विद्यासागर, गूंजे जयघोष

कहा, सागर जेल से हो रही है शुरूआत जल्द ही दूसरे राज्यों में दिखेगा असर, बंदियों को श्रम की महिमा सुनाते हुए बोले श्रम से जाग्रत होता है स्वाभिमान

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सागर

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Sanjay Sharma

Feb 06, 2019

Acharya Vidyasagar reached the Central Jail to bless the prisoners

Acharya Vidyasagar reached the Central Jail to bless the prisoners

सागर. आमतौर पर संगीनों के पहरे में शांत रहने वाले केंद्रीय जेल परिसर में मंगलवार दोपहर आचार्यश्री विद्यासागर के आगमन ने हलचल मचा दी। पुलिस और जेल प्रशासन ने आनन-फानन में तैयारियों की तब तक वहां पहुंचे श्रद्धालुओं द्वारा लगाए जा रहे आचार्यश्री के जयघोषों से जेल परिसर गूंजने लगा। जनसमूह के बीच दोपहर करीब 2.40 बजे मुनि संघ व श्रद्धालुओं के साथ आचार्यश्री केंद्रीय जेल पहुंचे। गुरुवर मुख्य द्वार से होते हुए सीधे हथकरघा शैड पहुंचे जहां बंदियों-जेल अधिकारी-प्रहरियों ने उनका पाद प्रक्षालन और आरती पूजन किया। आचार्यश्री ने हथकरघा और उन पर वस्त्र तैयार करने वाले बंदियों से मिलकर उन्हें आशीष दिया। आचार्यश्री ने बंदियों को धर्म और श्रम की महिमा भी समझाई और कहा सर्वप्रथम सागर जेल से हथकरघा का शुरूआत हो रही है, इसी का असर अन्य राज्यों में भी दिखेगा। इसमें अच्छे नंबरों में आप पास होंगे एेसा विश्वास है। इस नई पहल में एेसे नंबर ले लो जिसके आगे कोई नंबर ही न हो।

बंदियों-अफसरों ने किया पाद प्रक्षालन, आरती उतारी -

हथकरघा शैड में पहुंचते ही आचार्यश्री का भावनात्मक अभिनंदन बंदियों ने प्रार्थना सबका मंगल होवै से किया। इस मौके पर जेल अधीक्षक राकेश भांगरे, उप अधीक्षक मदन कमलेश के अलावा सीएसपी आरडी भारद्वाज, सेवानिवृत सिविल सर्जन डॉ.अरुण सराफ, डॉ अमित जैन और कम समय में दिन-रात मेहनत कर हथकरघा शैड तैयार करने व हथकरघा पर वस्त्र बनाने वाले बंदियों द्वारा आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन कर आरती पूजन किया गया।

एक-एक हथकरघे तक पहुंचे आचार्यश्री -

आचार्यश्री का आभा मंडल बंदियों की कड़ी मेहनत और उनकी लगन के चलते तैयार हुए शैड और हथकरघे पर वस्त्र तैयार होते देख दमक उठा। उन्होंने शैड में लगे 54 करघों में से एक के बीच पहुंचकर वहां काम कर रहे बंदी से बात भी की और उसे एेसे की श्रम साधना के माध्यम से जीवन सार्थक करने का आशीर्वाद भी दिया। आचार्यश्री के साथ मौजूद मुनि संघ भी उनके साथ हरकरघों का मुआयना करता रहा। उन्होंने हरकरघे के अलावा चरखे पर सूत कात रहे बंदियों के बीच पहुंचकर उन्हें भी आशीष दिया।

श्रम करने से जाग्रत होता है स्वाभिमान : आचार्यश्री

केंद्रीय जेल परिसर में बंदियों द्वारा संचालित 54 हथकरघा और उन पर वस्त्र तैयार करने वालों के बीच पहुंचे आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने बंदियों को श्रम के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा विद्या और अन्य साधनों से जो मिलता है उसमें उतना आनंद नहीं आता जितना श्रम से आता है। श्रम से प्राप्त फल के सेवन करने से तो स्वाभिमान जाग्रत हो जाता है और दूसरों का सहयोग करने की भावना अपने आप उमड़ती है। आचार्यश्री ने कहा देवों में इसकी प्यास रहती है कि लोग श्रम करें जो स्वर्ग और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त कर सके। देव स्वयं पुरुषार्थ नहीं कर सकते, उनको यहां पुरुषार्थ करने अनिवार्य रूप से आना है। लोगों की धारणा थी कि जो वस्त्र हाथ से बनाए जाते हैं बहुमूल्य नहीं होते। इनमें विविधता नहीं रहती और यह आधुनिक व्यक्तियों के उपयोग में नहीं हैं। दूसरा यह कि यह जल्दी नष्ट होता है, बहुत सी धारणाएं बन गई थीं उसका परिणाम यह निकला कि हाथ से बने वस्त्रों का पूर्णत: अभाव तो नहीं कह सकते लेकिन फिर भी आज के युग के लिए वे नई सी चीज लगती थी। उन्होंने मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ और पुड्डूचेरी की राज्यपाल किरण बेदी का नाम लिए बिना कहा कि योग की बात है यहां राजधानी से आने वाले हैं, देहली से भी आने वाले हैं। अच्छे राजनेता जो राष्ट्र के प्रति समर्पित हैं उनका आना भी सुनते हैं। आने वाली तिथि 15-16 को एेसा होगा।