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आचार्यश्री ने की 35 साल पुरानी याद ताजा कहा- खुरई सी एकता अन्यत्र नहीं देखी

हजारों श्रद्धालुओं ने की आचार्यश्री की भव्य अगवानी, यह भी कहा- जैन धर्म किसी एक सम्प्रदाय का धर्म नहीं, जैसे डॉक्टर का सब लाभ ले सकते हैं वैसे ही संत होते हैं

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Acharyashree Vidyasagar Sarvadharma Khurai Hanuman Jayanti

Acharyashree Vidyasagar Sarvadharma Khurai Hanuman Jayanti

खुरई. अतिशय क्षेत्र नवीन जैन मंदिर में विराजमान आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने खुरई आगमन पर विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए सर्वधर्म संभाव का संदेश दिया। आचार्यश्री ने कहा कि यहां के 1008 भगवान पार्श्वनाथ बड़े बाबा का अतिशय जग विख्यात है। उन्होंने अपने ३५ वर्ष पूर्व हनुमान जयंती पर झंडाचौक पर आयोजित धर्म सभा के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि यहां की एकता आपसी भाई-चारा एवं सद्भावना की मिसाल अन्यत्र देखने नहीं मिलती।
खुदा-राम-ईसा की नगरी में सदा खुशियां बरसती रहें, अमन शांति बनी रहे इसके लिए मेरा आशीर्वाद है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम एवं हनुमान जी का आदर सम्मान, पूजा सभी करते हैं, उसकी मुख्य वजह उनका व्यक्तित्व, कृतित्व एवं पवित्र गुणों की उपासना है। जैन धर्म किसी एक संप्रदाय का धर्म नहीं है, जैन धर्म को जो अंगीकार करता है, वही जैन है। दिगम्बर मुद्रा को धारण कर मोक्ष प्राप्ति एवं जन्म-मरण से मुक्ति ही इसका मूल आधार है।
आचार्यश्री ने कहा कि जैन संप्रदाय के अति प्राचीन एवं प्रमाणिक ग्रंथ 'पद्मपुराणÓ में भी भगवान राम एवं हनुमानजी का व्यापक वर्णन मिलता है, जिसका रिसर्च भी विगत कई वर्षों से चल रहा है। समस्त धर्मों में अहिंसा, प्राणी मात्र की रक्षा, परोपकार की भावना को प्रमुखता से उल्लेखित किया गया है। भगवान महावीर की देशना तो प्राणी मात्र के लिए है। उनका संदेश 'जिओ और जीने दोÓ तथा अनेकांत दृष्टि जैसे सिद्धांत एवं अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे उपदेश न केवल जैनियों के लिए है, अपितु संपूर्ण विष्व के लिए संजीवनी बूटी है। प्रवचन सभा का संचालन ब्रम्हचारी सुनील भैया, ब्रह्मचारी नितिन भैया एवं सहयोग संकलन अशोक 'शाकाहारÓ ने किया।
महापुरुषों को बांटना कुचेष्टा है
आचार्यश्री ने कहा कि जिस प्रकार मां किसी एक बेटे की नहीं होती, मां पर सब बेटों का समान अधिकार होता है, उसी प्रकार महापुरुष समुचित मानव जाति के प्राण होते हैं, उन पर एकाधिकार जमाना कुचेष्टा है। ये तो संपूर्ण विश्व की धरोहर हैं। जिस प्रकार डॉक्टर, हकीम, वैद्य सबके लिए होते हैं, सभी उनका लाभ उठा सकते हेैं, उसी प्रकार धर्म, संत, आचार्य, मुनि और अवतार सभी के लिए होना चाहिए। सभी धर्मों और सम्प्रदायों में जो श्रेष्ठ गुण भगवान महावीर की अहिंसा, भगवान राम की मर्यादा, हनुमानजी की समर्पण-भक्ति, बुद्ध की करूणा, नानक का साम्य, कबीर का फक्कड़पन, जीसस की क्षमा और मुहम्मद का ईमान, ये सभी के लिए
अनुकरणीय हैं।