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प्रशासन डाल रहा पर्दा: मेहर में एक और बुजुर्ग की मौत, ग्रामीण बोले उल्टी-दस्त से तोड़ा दम

जिले में 1825 गांव, लेकिन हैजा पीडि़त सिर्फ शराब फैक्ट्री के आसपास ही निकल रहे, फिर भी जिम्मेदार साधे चुप्पी सागर. मेहर गांव में एक और बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। ग्रामीण बोले महिला उल्टी-दस्त से ग्रसित थी जिसने मंगलवार को दम तोड़ दिया। वहीं गांव के तमाम जल स्त्रोतों में हैजा बैक्टीरिया की […]

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सागर

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Nitin Sadaphal

Jul 17, 2024

गांव में अभी भी नालियां, सडक़ें गंदगी से बजबजा रहीं हैं।

गांव में अभी भी नालियां, सडक़ें गंदगी से बजबजा रहीं हैं।

जिले में 1825 गांव, लेकिन हैजा पीडि़त सिर्फ शराब फैक्ट्री के आसपास ही निकल रहे, फिर भी जिम्मेदार साधे चुप्पी

सागर. मेहर गांव में एक और बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। ग्रामीण बोले महिला उल्टी-दस्त से ग्रसित थी जिसने मंगलवार को दम तोड़ दिया। वहीं गांव के तमाम जल स्त्रोतों में हैजा बैक्टीरिया की पुष्टि हो चुकी है। एक के बाद एक 5 मौत हो गईं लेकिन प्रशासन ग्रामीणों द्वारा शराब फैक्ट्री पर लगाए गए आरोपों की जांच न कर मामले में पर्दा डालने का काम कर रहा है। प्रशासन हैजा को मौसमी बीमारी बता रहा है, जबकि जिले में 1825 गांव हैं लेकिन हैजा पीडि़त सिर्फ शराब फैक्ट्री के आसपास ही निकल रहे। इस सीजन जिले के किसी भी गांव से एकसाथ 2 या 3 डायरिया मरीज आने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है लेकिन मेहर गांव की शराब फैक्ट्री के आसपास देवरी, सेमरा अटा, मेहर में थोक में मरीज सामने आ चुके हैं। यहां तक की मेहर आकर मजदूरी करने वालों को भी उल्टी-दस्त के चलते भर्ती करना पड़ा।

1 मौत हुई 4 नए मरीज आए

ग्रामीणों ने बताया कि मंगलवार को भूरी बाई सेन की मौत हो गई। महिला उल्टी-दस्त से ग्रसित थीं और घर में ही थीं। एक और मौत के बाद ग्रामीणों में बीमारी को लेकर फिर डर बैठ गया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में अभी भी नालियां, सडक़ें गंदगी से बजबजा रहीं हैं। पीने के लिए पानी नहीं है। लोग बीमार हो रहे हैं, मंगलवार को भी 4 मरीजों को उल्टी-दस्त की समस्या होने पर अस्थाई अस्पताल ले जाया गया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने छोड़ा गांव

मेहर गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शारदा अहिरवार ने बताया कि 2 तारीख को उसके भाभी-भैया, भतीजा-भतीजी और दोनों बेटियां एकसाथ बीमार हुईं तो वह उन्हें भाग्योदय अस्पताल लेकर आई। यहां वह भी बीमार पड़ गई। अब वह मेडिकल लीव लेकर सागर के पास भैंसा गांव में किराए से रह रही है। वहीं गांव में और भी घरों से महिलाएं बच्चों को लेकर मायके चली गईं।

तमाम जल स्त्रोत बंद, पानी का संकट

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने गांव के सभी जल स्त्रोत बंद कर दिए हैं और टैंकरों से पानी की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन करीब 15 दिनों से टैंकरों द्वारा पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है। गांव की आबादी 5600 है ऐसे में रोजमर्रा के कार्यों के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलता।

विशेष निगरानी, फिर भी कहीं से सूचना नहीं

मेडिकल कॉलेज सहित सभी अस्पतालों में हैजा मरीजों की विशेष निगरानी है। जिले की 765 ग्राम पंचायतों के 1825 गांव में अभी तक एकसाथ मरीज नहीं मिले। वहीं दूसरी तरफ मेहर गांव की शराब फैक्ट्री के आसपास के गांव सेमरा अटा, देवरी में हैजा के कई मरीजों भर्ती कराए गए। बमनोरा, और बांदरी गांव में जो मरीज सामने आए उनका संबंध भी मेहर गांव से रहा। यह प्रशासन के उस दावे की पोल खोल रहा है कि मेहर गांव का हैजा मौसमी बीमारी है।

मंगलवार को जो महिला की मौत हुई है उसकी उम्र 100 साल बताई गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने जो सूचना उन्हें दी है उसमें बताया गया है कि बुजुर्ग की मौत उम्रदराज हो जाने के बाद हुई। जिले में अभी किसी भी क्षेत्र से एकसाथ हैजा पीडि़त मरीज की सूचना मुझे नहीं है।

डॉ. ममता तिमोरी, सीएमएचओ।