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बीएमसी...सेकंड राउंड की काउंसलिंग में अगले सप्ताह से ही सीटें भरने की प्रक्रिया होगी शुरू
सागर. एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) ने श्योपुर और सिंगरौली के नए मेडिकल कॉलेज में 100-100 सीटों की मान्यता के बाद अब प्रदेश के दो पुराने मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 75 सीटें बढ़ाई हैं। सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 25 और छिंदवाड़ा के मेडिकल कॉलेज में 50 सीटें बढ़ाई गईं हैं। हालांकि बीएमसी प्रबंधन ने इस सत्र 50 सीटें बढ़ाने का आवेदन एनएमसी से किया था, लेकिन संसाधन व स्टाफ के अभाव में सिर्फ 25 सीटें ही बढ़ी। बीएमसी डीन डॉ. पीएस ठाकुर ने कहा कि बढ़ाई गई सीटों पर इसी सत्र से प्रवेश हो सकेगा। अभी काउंसलिंग को दूसरा राउंड बाकी है। सेकंड काउंसलिंग अगले सप्ताह से शुरू होगी जिसमें मेडिकल छात्र बढ़ी हुई सीटों पर आवेदन कर सकेंगे।
बीएमसी में 2009 में एमबीबीएस की 100 सीट पर एडमिशन की अनुमति मिली। 2019 में एनएमसी ने सीटें तो नहीं बढ़ाईं थीं, लेकिन ईडब्ल्यूएस कोटे में 25 सीटें भरने की अनुमति बीएमसी को दी थी। तभी से बीएमसी में 125 सीटों पर एडमिशन हो रहा था। इस वर्ष बीएमसी प्रबंधन ने 50 सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन किया था। जिसके बाद एनएमसी ने बीएमसी की 25 सीटें और बढ़ा दीं हैं। इसी सत्र से 150 सीटों पर प्रवेश होगा। 16 साल बाद बीएमसी में सीटों की वृद्धि की गई है।
बीएमसी में अभी 125 सीटों की मान्यता थी, लिहाजा डॉक्टर्स, प्रोफेसर, नर्सिंग स्टाफ और लैब टेक्नीशियन के पद सीमित थे। 150 सीटें होने के बाद अब बीएमसी में इन स्टाफ की संख्या में भी बढ़ोत्तरी होगी। इसका फायदा प्रशिक्षु डॉक्टर्स के अलावा क्षेत्र के मरीजों को भी होगा।
2009 में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 100 सीटों पर एमबीबीएस के पहले बैच की शुरूआत हुई थी। 2015 में बीएमसी का पहला बैच पास आउट हुआ। अब तक बीएमसी ने 1100 से अधिक डॉक्टर्स देश को दिए हैं। बीएमसी में पढ़ाई करने वाले डॉक्टर्स आज देश व विदेशों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद सागर शहर की इकोनॉमी भी बढ़ी है।
एनएमसी ने 2019 में 250 सीटों के हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने बीएमसी को राशि दी थी लेकिन जगह के अभाव में बीएमसी प्रबंधन न तो इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर पाया और ना ही स्टाफ की व्यवस्था हो पाई। राज्य सरकार ने अपने हिस्से का 40 प्रतिशत बजट देने में भी देरी की। लेक्चर हॉल, हॉस्टल, 300 बेड की अतिरिक्त अस्पताल बनाने डीपीआर बनी और कैंसिल होती रहीं इससे समय निकल गया। इस बीच 2023 में एनएमसी ने नियम बदल दिए और 250 सीटों की मान्यता खतरे में आ गई। इसलिए अब बीएमसी को 150 सीटों पर ही संतुष्ट रहना पड़ रहा है।
-एनएमसी ने बीएमसी में 150 सीटों पर प्रवेश की मान्यता दे दी है। सीटें बढऩे से मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि होगी और सागर से अतिरिक्त डॉक्टर्स बनेंगे। इसका फायदा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से क्षेत्र को होगा।
डॉ. पीएस ठाकुर, डीन बीएमसी।
Published on:
05 Sept 2025 08:12 pm
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