
सागर. रक्षाबंधन पर इस वर्ष भी करीब 3 हजार क्विंटल मावा की डिमांड है। जिले में इतनी भारी मात्रा में मावा का उत्पादन संभव नहीं है, लिहाजा दुकानदार मिलावटखोरों से संपर्क में हैं। नाम न बताने की शर्त पर इस गोरखधंधे से जुड़े लोगों की मानें तो सागर में मुख्यत: ललितपुर, भिंड, मुरैना और ग्वालियर से नकली मावा की खेप पिछले 15 दिनों से चोरी छिपे आ रही है। वहीं विभाग सालभर मिलावटी खाद्य सामग्री पकडऩे के लिए अभियान नहीं चलाते और त्योहार नजदीक आते ही दिखावे की कार्रवाई कर रहा है। जो सैंपलिंग की जा रही है उसकी रिपोर्ट जब आएगी तब तक माल खप जाएगा। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टर्स लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वह मिलावट से बचें और जांच-परखकर ही मिठाई घर लाएं।शहर में ही 250 दुकानें-
जिले में छोटी-बड़ी, रजिस्टर्ड व गैर रजिस्टर्ड करीब पंद्रह सौ दुकानें हैं, जहां पर मावा व मावा से बनी सामग्री बेची जाती है। विशेषज्ञों की माने तो जिले में रोज 300-400 क्विंटल मावा की डिमांड रहती है, लेकिन त्योहार आने पर यह डिमांड कई गुना बढ़ जाती है। सिर्फ सागर शहर में ही 250 दुकानें हैं। दुकानदार दावा करते हैं कि वह गांव से ही मावा मंगाते हैं, लेकिन मावा की डिमांड के हालात ये हैं कि सिविल लाइन की एक दुकान पर करीब 50 क्विंटल मिठाई बनाई जा रही है। अधिकांश दुकानों के गोदामों में मावा पहुंच चुका है।
डिमांड पूरी करने के लिए मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं, जो दूध में डिटर्जेंट, यूरिया, रिफाइंड ऑयल जैसी खतरनाक चीजें मिलाने से भी पीछे नहीं हटते। जिन्हें खाने से पेट में इन्फेक्शन के साथ कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा मिलावटी मिठाइयां लिवर, किडनी और हार्ट के लिए भी खतरनाक हैं।
विभाग के भरोसे न रहें, स्वयं परखें नकली मिठाई-
-रंगीन मिठाई को हाथ में रगड़ें यदि हाथ में रंग लगे तो इसमें रंग की मिलावट हो सकती है।
-नकली मावा पहचानने के लिए रगड़ने पर यदि घी नहीं निकला, केमिकल की गंध आए और दूध की महक न आए तो मावा नकली है।
-मावा की गोली बनाएं नकली मावा फटने लगेगा।
-मावा यदि ज्यादा दानेदार है तो मिलावट हो सकती है, क्योंकि असली में चिकनाहट होती है।
-चांदी की वर्क पहचानने के लिए वर्क को जलाने पर वह गोलीनुमा हो जाएगा, जबकि एल्युमीनियम के वर्क में जले हुए कागज जैसा लगेगा।
-केसर वाली मिठाई के एक दुकड़े को पानी में डालेंगे तो केसर रंग छोड़ेगी, यदि रंग नहीं निकला तो नकली केसर है।
-हमेशा ताजी, चखकर व सूंघकर ही मिठाई खरीदें।
-रंग-विरंगी मिठाई लेने से बचें।
-जानी-पहचानी दुकान से ही खरीदें और उसका बिल लें।
-दुकान पर साफ-सफाई जरूर चैक करें और पैक बंद मिठाई पर एफएसएसएआई सर्टिफिकेशन देखें।
-एफएसएसएआई के टोल फ्री नंबर 1800112100 पर शिकायत करें।
-फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
-जांच में दावा सही पाया गया तो भारी भरकम जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान।
-खाद्य सुरक्षा विभाग से भी शिकायत की जा सकती है।
-त्योहार के समय मिलावटखोर ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, इसलिए त्योहार में ज्यादा कार्रवाई की जातीं हैं। विगत सप्ताह से क्षेत्र की अलग-अलग दुकानों, गोदामों और सार्वजनिक स्थानों पर मिलावटी मावा को पकडऩे की कार्रवाई की जा रही है।
प्रीति राय, खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
एक्सपर्ट व्यू: डॉ. राजेश पटेल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट बीएमसी-
-त्योहार में मिठाइयों की डिमांड पूरा करने के लिए आरोपी यूरिया, रिफाइंड ऑयल जैसी खतरनाक चीजें मिलाते हैं। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है। यहां तक की मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए चांदी के वर्क भी मिलावटखोर एल्यूमीनियम व केमिकल से बना देते हैं, जो सेहत को कई तरह से नुकसानदायक है। मिलावटी मावा का असर 12-24 घंटे बाद दिखाई देता है, ऐसे में यदि जरा सा भी संदेह हो तो तत्काल डॉक्टर्स को दिखाएं, अन्यथा आपकी जान पर भी बन सकती है।
1 हजार साल भर में चलित वेन से सैंपल लिए।
268 सैंपल दुकानों व प्रतिष्ठानों में अलग से लिए गए।
150 मात्र सैंपल की रिपोर्ट आ पाईं।
27 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए।
8 लोगों से सिर्फ 48 हजार रुपए जुर्माना वसूला गया।
Published on:
18 Aug 2024 11:14 am
बड़ी खबरें
View Allसागर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
