सागर. दलपतपुर के पास वनक्षेत्र में शुक्रवार शाम मिले सेना के दशकों पुराने यूएक्सओ (अनएक्सप्लोडेड ऑर्डीनेंस) को पुलिस के बम डिस्पोजल स्कवॉड ने बारूद का उपयोग कर नष्ट कर दिया। इसके मिट्टी के कटाव के चलते स्वत: बाहर आने अथवा किसी व्यक्ति द्वारा सेना की रेंज के आसपास से उठाकर लाने का अनुमान है। बम डिस्पोजल स्कवॉड ने शनिवार दोपहर 2.40 बजे मोर्टार के इस बम को नष्ट करने में सफलता पाई। यदि मोर्टार यह बम फट जाता तो कई लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।
जानकारी के अनुसार बण्डा थानांतर्गत दलपतपुर चौकी क्षेत्र में आबादी से सटे पठार पर वनकर्मी काम कर रहे थे। इसी दौरान एक वनकर्मी की नजर झाडिय़ों के बीच धातु के सिलेण्डरनुमा वस्तु पर पड़ी। जब वनकर्मी पास पहुंचे तो सेना के इस पुराने बम (यूएक्सओ) को देखकर घबरा गए। पठार पर रखे इस बम के फटने की आशंका से परेशान वनकर्मियों ने खबर बण्डा पुलिस को दी जिसके बाद बम डिस्पोजल स्कवॉड मौके पर पहुंचा लेकिन अंधेरा हो जाने की वजह से बम वाले क्षेत्र को सुरक्षित कर ऑपरेशन टाल दिया गया।शनिवार सुबह बण्डा एसडीओपी शिखा सोनी, थाना प्रभारी आनंद राज मौके पर पहुंचे। बम डिस्पोजल स्कवॉड में शामिल तकनीकी एक्सपर्ट उग्रसेन प्रजापति, मनोज विश्वकर्मा और हेमंत त्रिपाठीने मोर्चा संभाला। यूएक्सओ के आकार और उसकी क्षमता का आंकलन कर आबादी से दूर पठार पर गड्ढा खोदा गया और फिर एहतियात के साथ बम को वहां ले जाया गया। स्कवॉड में शामिल सदस्यों ने बम को गड्ढे में उतारा और बारूद लगाकर मिट्टी से दबा दिया। बारूद के धमाके के बाद यूएक्सओ जब फटा तो न केवल पठार बल्कि नजदीक स्थित बसाहट वाला क्षेत्र भी थर्रा गया। धमाके की आवाज दूर तक गूंजती रही।
तकनीकी एक्सपर्ट ने बताया सेना का यह यूएक्सओ मोर्टार से दागने वाले बम जैसा है। करीब 12 इंच लंबा और 3 इंच गोलाई वाले इस बम के कई वर्षों तक मिट्टी में दबे रहने से ऊपरी खोल पर जंग लग गई थी। पहले भी सेना की फायरिंग-परीक्षण रेंज के आसपास के गांवों में कई यूएक्सओ मिल चुके हैं। इन्हें काटकर धातु निकालने की कोशिश के दौरान हुए धमाके में कई लोग जोखिम की चपेट में भी आ चुके हैं।