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एसी में रहने वाले बेल्जियम मेलोनाइज डॉग को सूट नहीं किया वन विभाग का टीनशेड, मौत

अव्यवस्थाओं की मार नहीं झेल पाया स्नीफर डॉग, टायसन का नाम सुनते ही थर-थर कांपते थे शिकारी व लकड़ी माफिया।    

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सागर. नौरादेही अभयारण्य की रखवाली के लिए मप्र वाइल्ड लाइफ द्वारा भेजा गया बेल्जियम मेनोलाइज प्रजाति का डॉग 'टायसन' पांच माह भी अव्यवस्थाओं की मार नहीं झेल पाया और ५ मई को डॉग की मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारी डॉग की मौत का कारण लंबी बीमारी बता रहे हैं, लेकिन इससे हटकर भी कुछ बातें विभागीय सूत्रों से ही पता चल रहीं हैं। जिनको माने तो डॉग की मौत का कारण बीमारी तो हो सकती है, लेकिन डॉग के बीमारी की चपेट में आने की वजह वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी भी बताई जा रही है और यही वजह है कि डॉग की मौत के पांच दिन बाद भी अधिकारी मामले को गुपचुप रखे हुए हैं।

सूंघने की क्षमता के कारण वल्र्ड फैमस

बेल्जियम मेनोलाइज प्रजाति का डॉग अपनी सूंघने की क्षमता के कारण वल्र्ड फैमस है। बताया जाता है कि इस प्रजाति के डॉग ब्रिटेन आर्मी के डॉग स्क्वाइड की कमान संभालते हैं तो वहीं अमरीका में व्हाइट हाउस की सुरक्षा में भी इन्हीं प्रजाति का उपयोग किया जाता है। नौरादेही अभयारण्य भेजे गए इस डॉग ने अलग-अलग शिकारों के पांच से छह उलझे हुए मामलों को सुलझाने में वन विभाग की मदद कर आरोपियों को पकड़वाने में भी मदद की।

लीवर किडनी हो चुके थे फेल
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्नीफर डॉग आने के बाद से ही बीमार था, उसका जबलपुर बिटनेरी कॉलेज में इलाज चल रहा था। मौत के तीन से चार दिन पहले भी उसे इलाज के लिए जबलपुर भेजा गया था। डॉग की मौत के बाद तीन बिटनेरी डॉक्टर्स की टीम द्वारा कराए गए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किडनी व लीवर आदि फेल होना बताया गया है। इससे यह बात तो यह है कि डॉग लंबे समय से बीमारी की चपेट में था। इसके बाद भी उसकी देखभाल में अनदेखी की गई है।

यह बातें भी आ रहीं सामने
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्नीफर डॉग की देखभाल, खान-पान से लेकर रहने तक की व्यवस्था में लापरवाही के कारण मौत हुई है। इसमें अधिकारियों पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि उन्होंने डॉग को वातानुकूलित कमरे में रखने की जगह अपने आवास के टीन शेड में भी कुछ समय रखा था, जबकि बेल्जियम मेलोनइज एेसी प्रजाति का डॉग था कि उसे गर्मी से बचाना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके अलावा विभाग के जिम्मेदारों के द्वारा कि गई कई और अन्य प्रकार की लापरवाहियां भी बताई जा रहीं हैं।

अस्वस्थ्य था
डॉग जब सागर भेजा गया था तब से ही वह अस्वस्थ्य था। जबलपुर में लगातार इलाज चल रहा था। पीएम रिपोर्ट में भी उसकी किडनी-लीवर खराब होने की पुष्टि हुई है। विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।

क्षितिज कुमार, डीएफओ, दक्षिण वन मंडल