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Bharat Band शहर ने बंद को दी मौन सहमति, पुलिस रही तैनात और हर तरफ शांति, जानिए बंद का हाल

स्टेशन, बस स्टैंड के साथ सभी प्रमुख बाजार और सदर-मकरोनिया में दुकानें बंद रहीं

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Bharat Band No community no organization social closure in city

Bharat Band No community no organization social closure in city

सागर. न बाइक सवार युवाओं की टोलियां निकलीं, न संगठन सड़कों पर उतरे और न कहीं हंगामे की स्थिति बनी, फिर भी बंद एेसा रहा कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। डॉ. हरिसिंह गौर विवि को केंद्रीय दर्जा दिलाने की मांग को लेकर हुए बंद के करीब एक दशक बाद शहरवासियों ने इतना प्रभावी बंद देखा। स्टेशन, बस स्टैंड के साथ सभी प्रमुख बाजार और सदर-मकरोनिया में दुकानें बंद रहीं। मेडिकल, अस्पताल, डेयरी जैसी जरूरी सेवाओं के अलावा इक्का-दुक्का स्थानों पर ही चाय-नाश्ते की गुमटियां खुली नजर आईं। २ अप्रैल को दलित संगठनों की रैली के दौरान भड़के उपद्रव से सतर्क पुलिस-प्रशासन ने ६ थाना क्षेत्रों में धारा १४४ लगाई थी, लेकिन पूरे दिन कहीं से अप्रिय समाचार नहीं आया। पूरा शहर बंद रहा लेकिन किसी ने दुकान-बाजार बंद कराने जबरदस्ती नहीं की। बाजार, चौक-चौराहे छाबनी में बदले नजर आए। आईजी, कलेक्टर-एसपी ही नहीं पुलिस व प्रशसानिक अमले में मुस्तैद अफसर भी लगातार पेट्रोलिंग करते रहे।


१ घंटे में पत्थर न हटे तो सस्पेंड कर दूंगा...
सागर. कटरा बाजार में मस्जिद से कीर्ति स्तंभ और विजय टॉकीज मार्ग पर नगर निगम प्रशासन द्वारा फुटपाथ तोड़े जाने का काम करवाया जा रहा है। मंगलवार को सुबह शहर बंद के दौरान जब कलेक्टर आलोक कुमार सिंह कटरा बाजार में निरीक्षण कर रहे थे तभी उनकी नजर फुटपाथ से निकले पत्थरों पर पड़ी। बंद के दौरान इस मटेरियल का उपयोग कोई आसामाजिक तत्व न कर ले, इस आशंका में कलेक्टर ने तत्काल मामले को संज्ञान में लिया। उन्होंने निगम के अधिकारियों को तलब कर कहा कि यदि एक घंटे में सारे पत्थर यहां से नहीं हटाए तो सबको सस्पेंड कर दूंगा। कलेक्टर सिंह के सख्त लहजा को देख निगम प्रशासन ने पूरी टीम मैदान में उतार दी।


इधर, वाहनों की निकाल दी हवा
ड्यूटी करने बाहर से आए पुलिसकर्मियों की नजर वाहनों पर भी रही। मोतीनगर थाना के अंतर्गत बड़ा बाजार श्रीराम चौक पर पुलिसकर्मियों ने जब एक बाइक पर तीन लोगों को बैठे देखा तो उसकी हवा निकाल दी।


चाय मिली न नाश्ता
बंद के कारण शहर में होटल-ढाबे बंद रहे। जिस कारण लोग नाश्ता-खाना के लिए परेशान होते रहे। बस स्टैण्ड सहित कटरा, बड़ाबाजार, सिविल लाइन, गोपालगंज, मकरोनिया, मोतीनगर में नाश्ते की दुकानें नहीं खुली। शहर में खाना और नाश्ता की छोटी-बड़ी मिलाकर करीब एक हजार से अधिक दुकानें हैं, जहां हर रोज हजारों लीटर दूध से लेकर नाश्ता व खाने की खपत होती है। कई जगह पर कुछ होटल तो खुली रहीं, लेकिन वहां कुछ नहीं मिला।
उपद्रव की आशंका में घर में ही रहे लोग
आम दिनों की तरह सड़कों पर वाहनों की आवाजाही नहीं रही। हालांकि लोग बाहर निकले, लेकिन लोक परिवहन की जगह उन्होंने निजी वाहनों का उपयोग किया। स्थिति यह थी कि जो यात्री वाहन ठसाठस यात्रियों से भरे होते थे, वे मंगलवार को सवारियां का इंतजार करते नजर आए। चाहे फिर वह शहर का लोकल परिवहन हो या शहर से बाहर जाने वाली यात्री बसें। सभी में क्षमता के अनुरूप सवारियां नहीं मिल सकीं। जिसके कारण सड़कों पर खाली वाहन दौड़ते नजर आए।
स्टेशन व स्टैंड पर भी सुनसान
एेसा नहीं है कि यात्रियों की कमी शहर के चौक चाराहों या ऑटो-चैम्पियन स्टैंड पर रही हो। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भी न के बराबर ही यात्री दिखाई दिए। इसका असर यह हुआ कि शहर के लोकल परिवहन करने वाले अधिकांश वाहन मालिकों-चालकों ने सुबह एक-दो घंटे के इंतजार के बाद वाहन निकाले ही नहीं।
जहां रोज पांच हजार लोग दिखते थे, वहां
नजर आए ६० व्यक्ति
ये चित्र कटरा बाजार का है। अमूमन सामान्य दिनों में यहां दोपहर के समय रोजाना पांच से सात हजार लोग मौजूद होते हैं। लेकिन बंद के दौरान मंगलवार को यहां केवल ६० लोग नजर आए। इनके चेहरे पर भी खौफ सा दिखा।

पुलिस ने तड़के ही कर दी थी घेराबंदी
मंगलवार को सुबह सूरज निकलने से पहले ही पुलिसकर्मियों ने शहर को अपने साए में ले लिया था। करीब एक हजार पुलिसकर्मियों के अलग-अलग जत्थे शहर के प्रमुख बाजार में निगरानी के तीन बत्ती से राधा तिराहा और नमक मंडी से विजय टॉकीज के अलावा बस स्टैंड, सदर, मकरोनिया, सिविल लाइन, राहतगढ़ बस स्टैंड क्षेत्र में डेरा डाल चुके थे।


प्रवेश मार्गों पर भी रही कड़ी निगरानी
बंद के दौरान शहर में बाहरी तत्वों के कारण माहौल बिगडऩे की आशंका के चलते पुलिस द्वारा आधी रात से ही प्रवेश मार्गों पर बेरिकेडिंग कर वाहनों की चैकिंग शुरू कर दी गई थी। मंगलवार को भी वाहनों को कड़ी निगरानी के बीच शहर के बीच से गुजरने दिया गया। इस दौरान संदेहास्पद नजर आने वाले वाहनों की पुलिस बल द्वारा सघन तलाशी भी ली गई।
दलित संगठनों द्वारा की गई तोडफ़ोड़ के बाद सोशल मीडिया पर बंद के आव्हान ने उपद्रव की आशंका बढ़ा दी थी। प्रशासन ने इससे निपटने हर तैयारी कर ली थी। मंगलवार को पुलिस बल के साथ उतारा गया बम डिस्पोजल और डॉग स्क्वॉड प्रमुख स्थानों की सर्चिंग करता रहा।
सुबह से शाम तक अफसर पेट्रोलिंग पर रहे। आईजी सतीश कुमार सक्सेना के अलावा कलेक्टर, एसपी, एएसपी, एसडीएम, डीएसपी स्तर के अफसर पूरे शहर में घूमकर हालात की निगरानी करते रहे। वहीं थाना स्तर पर टीआई अपने बल के साथ मुस्तैद रहे। इस दौरान पुलिस थाना क्षेत्र के निगरानी बदमाश और संदेहियों का लेकर भी चौकस रही।
बंद के समर्थन में निकाली रैली
मंगलवार को सागर के ढाना में कुछ बाइक सवार युवकों ने रैली निकाली। यह रैली बंद के समर्थन में निकालने जाने की खबर
लगते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने माहौल बिगडऩे की आशंका को देखते हुए बाइक सवारों को खदेड़ दिया। इस दौरान कुछ समय के लिए ढाना में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही युवक मौके से निकल गए। पुलिस की सतर्कता के चलते बड़ा विवाद टल गया।


विवादित पोस्ट की शिकायत
रजाखेड़ी निवासी युवक ने एक वाट्सऐप ग्रुप पर विवादित पोस्ट की शिकायत की है। युवक के अनुसार वह सैनिक गर्जना नामक गु्रप से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार सोमवार देर रात लगभग एक बजे उसने ग्रुप के सदस्य संदीप द्वारा दलित समुदाय पर आपत्तिजनक पोस्ट देखी, लेकिन ग्रुप के एडमिन महेश द्वारा इसे हटाया नहीं गया। न इसकी शिकायत की गई। शिकायतकर्ता युवक कपिल रोहित ने शिकायत में ग्रुप पर किए गए आपत्तिजनक पोस्ट की स्नैपशॉट भी पुलिस को सौंपी है। सोमवार रात करीब 1 बजे पद्माकरनगर थाने में की गई शिकायत के बाद पुलिस ने मामला जांच में ले लिया है।
शासकीय कार्यालयों में पसरा रहा सन्नाटा
सागर. बंद के आह्वान का असर पूरी तरह से देखने को मिला। इस घटनाक्रम से शासकीय कार्यालय में अछूते नहीं रख सके। कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारी तो रोजाना की तरह पहुंचे लेकिन हितग्राहियों व अन्य लोगों के न पहुंचने से सभी परिसरों में सन्नाटा पसरा रहा। मंगलवार को कलेक्टोरेट में आयोजित हुई जनसुनवाई में भी पिछले सप्ताहों की तुलना में बहुत कम संख्या में आवेदन पहुंचे। इनमें भी शहरी तो गिने-चुने रहे। उधर, जिला अस्पताल, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सहित अन्य अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या कम दिखी। नगर निगम कार्यालय में तो अवकाश जैसा माहौल रहा।
छात्रावासों में डलवा दिए गए थे ताले
बंद में छात्रावास में रहने वाले छात्र-छात्राओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए अफसरों ने छात्रावासों में ताला ही जड़वा दिए। तहसीली स्थित गल्र्स छात्रावास में ताला डला रहा।

दो दिन पूर्व जिला प्रशासन ने इस आशय का आदेश भी जारी किया था कि छात्रावासों में रहने वाले छात्र किसी भी प्रकार की गतिविधि में शामिल न हों और उनसे दूरी बनाकर रखें।

बोले जनप्रतिनिधि
बंद शांतिपूर्वक रहा, यह अच्छी बात है। लोगों ने शांति का परिचय दिया। पूर्व के बंद में भी मैंने लोगों से शांतिपूर्वक बंद करने का आह्वान किया था। लोकतंत्र में अपनी बात कहने का सभी को हक है, लेकिन वह शांतिपूर्वक होना चाहिए।
प्रदीप लारिया
विधायक व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष
भारत वर्ष के इतिहास में यह एेसा बंद पहली बाद देखा। न कोई संगठन, ना राजनैतिक दल, फिर भी शांति पूर्वक बंद रहा। लोगों ने स्वयं ही बंद रहा, एक तरह से यह स्वस्फूर्त बंद था।
शैलेंद्र जैन
विधायक सागर
बंद को लेकर लोगों ने शांतिपूर्वक रहने का संदेश दिया है। सभी वर्ग के लोग चाहते हैं कि आपसी भाई-चारा कायम रहे, सागर की संस्कृति है। २ मार्च का बंद भी शांतिपूर्वक था, लेकिन कुछ असामाजिक तत्व शामिल हो गए, इसलिए माहौल बिगड़ा, एेसा नहीं होना चाहिए था।
रेखा चौधरी
जिला अध्यक्ष कांग्रेस

सीधी बात आलोक कुमार सिंह, कलेक्टर, सागर
पत्रिका: बंद के दौरान कोई संगठन या लोग बाहर नहीं आए, आपका
क्या कहना है?
कलेक्टर: कानून व्यवस्था बनाए रखने हमने तैयारियां की थी। व्यापारिक, सामजिक व जनप्रतिनिधयों के साथ बैठकें की। नागरिकों, संगठनों सहित सभी का सहयोग मिला, यही वजह है बंद शांति पूर्व रहा।
पत्रिका: बंद में कोई घटना
सामने आई?
कलेक्टर: अधिकारी-कर्मचारी शहर भर में तैनात थे, सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। बंद में कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
पत्रिका: खुफिया तंत्र ? को कैसे
सक्रिय किया था।
कलेक्टर: यह तंत्र तो हमेशा सक्रिय रहता है, लेकिन हमने राजस्व अधिकारियों, पटवारियों को भी इस काम में लगाया था और मीडिया भी सहयोगी रहा है।
पत्रिका: धारा १४४ कब तक रहेगी। कलेक्टर: ११ अप्रैल की सुबह तक, सभी स्कूल-कॉलेज खुल जाएंगे, स्थितियां सामान्य बहाल होगी।

सराफा दुकानें मंगलवार को बंद रहती हैं, लेकिन यदि मंगलवार नहीं होता तब भी हमारे प्रतिष्ठान बंद रहते। संजीव दिवाकर,
सराफा व्यापारी, बड़ा बाजार
स्वेच्छा से दुकान बंद रखी। सभी को आर्थिक आरक्षण मिले। किसी भी जाति विशेष को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
शिवकांत पाण्डे,
किराना व्यापारी, तहसीली
डॉक्टर होने के नाते पहले में मरीजों के हित में क्लीनिक खोलने के पक्ष में था, लेकिन देश के हालात जो हैं भविष्य को देखते हुए हमनें बंद रखा है।
डॉ. डीपी चौबे, यादव कॉलोनी
शांतिपूर्ण बंद का समर्थन करना चाहते थे, इसलिए दुकान नहीं खोली। यह एकजुटता का नतीजा है कि आज पूरा भीतर बाजार बंद है।
हरिशंकर साहू, व्यापारी,
युवाओं को आर्थिक आरक्षण की जरूरत है। २ अप्रैल की घटना के बाद किसी जाति विशेष को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
प्रशांत जैन, कपड़ा व्यापारी, लिंक रोड
एक दिन के नुकसान से आपत्ति नहीं है लेकिन अब आर्थिक आरक्षण मिलना ही चाहिए। स्वेच्छा से दुकान बंद रखी। कमल कुमार सूर्यवंशी,
फल विक्रेता,कटरा
२ अप्रैल को जो तोडफ़ोड़ हुई, इसके बाद हमने आज दुकानें नहीं खोली हैं। हमें किसी ने नहीं कहा कि दुकान को बंद रखना है, यह स्वेच्छा से लिया गया है। हालांकि दुकान बंद करने से धंधा प्रभावित होता है।
कमल हिंदुजा, व्यापारी, सिविल लाइन
भारत बंद के आह्वान पर दुकान को बंद रखा। किसी भी तरह के विरोध से बचने के लिए दुकान नहीं खोली।
बलराम छबलानी, जनरल स्टोर, सिविल लाइन