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यहां अलमारियों में कैद है किताबी ज्ञान, कागजों में चल रही लाइब्रेरी

स्कूली शिक्षा के जिले में बुरे हाल हैं। आलम यह है कि जिले के स्कूलों में लाइब्रेरी कागजों में संचालित हो रही हैं।

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Books Are in the shelves

Books Are in the shelves

सागर. स्कूली शिक्षा के जिले में बुरे हाल हैं। आलम यह है कि जिले के स्कूलों में लाइब्रेरी कागजों में संचालित हो रही हैं। जहां थोड़ी-बहुत किताबें हैं, वे अलमारियों में कैद हैं। जिले के 111 हायर सेकंडरी स्कूलों में लाइब्रेरियन का पद ही खाली है। शहर के केवल एक्सीलेंस स्कूल में शिक्षक मनोज नेमा लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं। हाई स्कूल, मिडिल और प्राइमरी में इस पद की स्वीकृति ही नहीं है।
सालों से बाहर नहीं निकाली गई किताबें
शासकीय माध्यमिक स्कूल तिली में भी लाइब्रेरी का अभाव है। यहां अलमारी में रखी पुस्तकें वर्षों से बाहर ही नहीं निकाली गई हैं। शासन द्वारा लगभग 5 वर्ष पहले लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें दी गई थीं। अतिरिक्त कक्ष न होने से किसी का ध्यान भी इन पुस्तकों पर नहीं रहता है।
प्राचार्य के कक्ष में रखी पुस्तकें: शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल बाघराज में लाइब्रेरी नहीं है। यहां कुछ पुस्तकें प्राचार्य के कक्ष की अलमारी में रखी हैं, जिन्हें विद्यार्थी स्कूल में रहकर नहीं पढ़ पाते। प्राचार्य एम श्रीवासत्व ने बताया कि नया भवन 2013 में ही बना है। लाइब्रेरी के लिए अतिरिक्त कक्ष नहीं है।
दान में मिलीं किताबें अलमारी में सजाईं
शासकीय हाईस्कूल कनेरादेव में लाइब्रेरी अलमारी तक सीमित है। प्राचार्य एनके श्रीवास्तव ने बताया कि गत वर्ष सांसद लक्ष्मीनारायण यादव ने पुस्तकें दान की थीं। लाइब्रेरी की देखरेख के लिए शिक्षक को इंचार्ज बनाया है, आज वह स्कूल नहीं आईं हैं। इसलिए अलमारी बंद है।
हर साल हजारों रुपए किए जा रहे खर्च
स्कूल की स्थापना पर ही हाईस्कूल और हायर सेकंडरी को 25 हजार रुपए की राशि पुस्तकालय के लिए दी जाती है। वहीं प्राइमरी और मिडिल स्कूल को 10 हजार रुपए दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त हायर सेकंडरी के लिए 50 हजार रुपए साफ-सफाई, खेलकूद के साथ लाइब्रेरी में नई पुस्तकें रखने के लिए दिए जाते हैं। लेकिन यह राशि कहां खर्च हो रही है, अधिकारी इसकी कभी पड़ताल नहीं करते।