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mp election 2018 बाहर किए हजारों लोगों की नाराजगी बनेगी मुसीबत!

कैंट की मतदाता सूची का मामला, एक साल पहले कैंट बोर्ड ने मतदाता सूची से काटे थे छह-सात हजार नाम

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Cantonment Voters mp election 2018

Cantonment Voters mp election 2018

सागर. कैंट बोर्ड की मतदाता सूची से बाहर किए गए हजारों लोगों की नाराजगी विधानसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। कैंट बोर्ड ने रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर करीब एक साल पहले अगस्त- सितंबर में क्षेत्र के छह से सात हजार रहवासियों के नाम मतदाता सूची से काट दिए थे। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग मांगा, लेकिन आज तक उनके नाम वापस सूची में नहीं जोड़े जा सके हैं। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों में खासी नाराजगी है और लोग विधानसभा चुनाव में सत्तासीन भाजपा व वनवास झेल रही कांग्रेस का विरोध करने तैयार बैठे हैं।
निर्माण को बनाया था आधार
कैंट बोर्ड ने उन लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे थे, जिन्होंने आवंटित जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य किया है। इसको लेकर रक्षा मंत्रालय द्वारा पचमढ़ी कैंट बोर्ड भंग करने वाले हाइकोर्ट के निर्णय को आधार बनाया गया था। यह निर्देश रक्षा मंत्रालय के डीजी/पीडी ने देश की सभी कैंट को दिए थे, कि जो लोग किसी भी प्रकार का अतिक्रमण किए हैं उनके नाम मतदाता सूची से काट दिए जाएं।
सांसद, विधायक और जिलाध्यक्ष से नाराजगी
मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों में सांसद लक्ष्मीनारायण यादव, विधायक प्रदीप लारिया और भाजपा जिलाध्यक्ष व कैंट पार्षद प्रभुदयाल पटैल से नाराजगी है। इसका कारण जनप्रतिनिधियों के विफल प्रयास बताए जा रहे हैं। सांसद यादव ने यह बात शीतकालीन सत्र में संसद में रखी थी, लेकिन निराकरण नहीं करा पाए। चूंकि कैंट बोर्ड स्थानीय निकाय है और जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं उनको स्थानीय निकाय में मिलने वाली सुविधाएं बंद हो गई हैं। जिसमें विवाह, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे छोटे-छोटे काम भी बंद हो गए हैं।
सबसे ज्यादा दो वार्डों में काटे नाम
जानकारी के अनुसार कैंट बोर्ड ने सबसे ज्यादा करीब सवा तीन हजार मतदाताओं के नाम वार्ड नंबर ६ व ७ से काटे थे। इसमें सात नंबर वार्ड से भाजपा के जिलाध्यक्ष प्रभुदयाल पटैल स्वयं पार्षद हैं और उनका नाम भी सूची से काट दिया गया है। इसमें वे लोग थे जिनकी कृषि भूमि की लीज रिन्युवल नहीं की गई, जबकि लोगों का कहना है कि वे लीज रिन्युवल के लिए वर्ष २०१३ में कैंट बोर्ड को आवेदन कर चुके थे और यह अभी तक लंबित है। इसलिए कृषि लीज धारियों को अतिक्रमणकारी मानते हुए उनके नाम मतदाता सूची से हटाना उचित नहीं है।