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सागर. तिलकगंज क्षेत्र में शराब के नशे में स्कूल की बस चलाने की घटना सामने आने के बाद परिवहन विभाग को फिर मोबाइल एप की याद आई है। एक एप के जरिए स्कूल बसों के संबंध में सारी जानकारी अभिभावकों तक पहुंचाई जाएगी। हालांकि अभी यह प्रयोग शुरुआती चरण में है। उधर, हाल फिलहाल विभाग के पास नियमों की पालना के लिए कोई ठोस प्लान नहीं है, नतीजतन अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
जानकारी के अनुसार शनिवार की तरह स्थिति दोबारा न बने इसके लिए परिवहन विभाग कार्ययोजना तैयार कर रहा है। एप के जरिए स्कूल बसों के संबंध में अभिभावकों को सूचना उपलब्ध कराई जाएगी। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि एप में बसों के संचालन को लेकर जानकारी फीड करने पर विचार किया जा रहा है। इसमें ड्राइवर, बस परमिट और रजिस्ट्रेशन की जानकारी रहेगी। कोई भी व्यक्ति एप डाउनलोड कर बस की स्थिति देख सकता है। गड़बड़ी होने पर शिकायत प्रबंधन से कर पाएगा।
ड्रंक एंड ड्राइव का मामला दर्ज
आरोपी ड्राइवर रजाखेड़ी निवासी नमनीत ऊर्फ राजू को सोमवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। उसके खिलाफ पुलिस ने ड्रंक एंड ड्राइव का मामला दर्ज किया है। उधर, परिवहन अधिकारी लाइसेंस सस्पेंड करने की तैयारी कर रहे हैं। बताया जाता है कि स्कूल बस का परमिट भी रद्द किया जाएगा। दोनों कार्रवाई रविवार को प्रस्तावित की गई हैं। गौरतलब है कि तिलकगंज क्षेत्र में शनिवार को नमनीत को शराब के नशे में बस चलाते हुए लोगों ने पकड़ा था। आरटीओ शर्मा ने घटना के लिए शैलेष मेमोरियल स्कूल प्रबंधन को दोषी बताया है। उनके अनुसार बच्चों को बस से रवाना करने से पहले ड्राइवर की स्थिति देखनी चाहिए थी।
शहर में स्कूली बसों की स्थिति ठीक नहीं है। बच्चों को समय पर न तो लेने पहुंचती है न ही छोडऩे। एेसे में अभिभावकों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। बसों की जांच भी होनी चाहिए। परमिट और फिटनेस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
डॉ. नीरज गोस्वामी, अभिभावक
स्कूल बस चलाने वाले ड्राइवरों पर ध्यान देने की काफी जरूरत है। रात के वक्त पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों की सर्चिंग करती है। सुबह के वक्त भी पुलिस प्रशासन को खासतौर पर स्कूली बस चालकों की जांच करने की जरूरत है।
राकेश सोनी, अभिभावक
स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस लगाया जाना चाहिए। बस में एक घंटे से अधिक समय तक बच्चे रहते हैं। एेसे में कैमरे में कम से कम बस की स्पीड और बच्चों को देखा जा सकता है। स्पीड और लोकेशन भी पता चलेगी। - राजेश ठाकुर
&मैं अपने बच्ची को खुद स्कूल छोडऩे और लेने जाता हूं, क्योंकि बच्चों को बस में स्कूल से घर तक आने में एक घंटे से अधिक समय लग जाता है। ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर लाया ले जाया जाता है।
- सतीश भंडारी
Published on:
19 Feb 2018 09:38 am
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