
Childrens band party in the sagar city
सागर. कहते हैं बाल मन अपने स्कूल, घर और सडक़ की हर अच्छी-बुरी चीजों को देखता है और उनसे कुछ न कुछ जरूर सीखता है। ऐसे ही तीन नन्हें कलाकारों ने सडक़ पर बचते बैंड को अपना शौक बनाकर अंदर के हुनर को जगाया और अब वे भी बैंड मास्टर बन गए हैं। कॉन्वेंट स्कूल में पढऩे वाले इन तीन छात्रों का हुनर इन दिनों शहर के लक्ष्मीपुरा वार्ड की गलियों में गूंज रहा है।
कई तरह की धुन बजाते हैं नन्हे कलाकार
ध्रुव, धैर्य और दीप प्रताप राजपूत एक नहीं बैंड से कई प्रकार की धुन बजाते हैं। आपको सुनकर यह आश्चर्य होगा कि इन मासूमों ने शादी विवाह में सडक़ और अपनी गलियों में बचते बैंड को देखकर यह शौक पाला और अपनी पॉकेट मनी को एकत्रित कर पहले बैंड खरीदे हैं।
बिना गुरु के सीखी कला
ये बच्चों की लगन ही थी कि धु्रव ने धु्रव की तरह समर्पण दिखाया। धैर्य ने सीखने में धैर्य का परिचय दिया और दीप ने अपना हुनर दीपक की ही तरह प्रकाशमान किया और आज इनके चर्चे हैं। सातवी कक्षा में पढ़ाई कर रहे ध्रुव ने बताया कि हम गलियों में शादी और ऐसे कई कार्यक्रमों में बैंड बजते देखते थे, इसी से हमें यह शौक पैदा हुआ। ध्रुव के अनुसार महाभारत सीरियल में एकलव्य द्रोणाचार्य को छुप-छुप के उस वक्त देखते थे, जब वो पांडवों और कौरवों को धनुष विद्या सिखाते थे। एकलव्य देखते-देखते सीख गया तो फिर हम क्यों नहीं सीख सकते। हम तीन दोस्तों ने ठाना और हम बिना गुरु के यह सब सीख गए। धैर्य और दीप प्रताप राजपूत ने बताया कि हमनें अपनी लगन और मेहनत से यह कर दिया।
Published on:
18 Sept 2017 09:48 pm
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