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श्रेय लेने की होड़ में मत रहो, जो कर रहे हैं ठाकुरजी कर रहे हैं यह भाव हर संकट से पार लगा देगा: पं इंद्रेश महाराज

बालाजी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा। मधुर ब्रिज बोली से शब्दों ने अद्भुत रूप लिया और श्रोता भाव विभोर होते दिखाई दिए।

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सागर

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Rizwan ansari

Feb 05, 2025

sagar

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हम सोचते हैं कि किसी भी आयोजन का भार हमारे ऊपर है। जबकि जो हो रहा सब ठाकुर जी संभाले हुए हैं। लेकिन उनकी धारणा श्रेय लेने की नहीं है। वह तो कहते हैं ‘‘कछु माखन को बल बढ़ो कछु गोपन करी सहाय। राधाजी की कृपा से गोवर्धन लियो उठाए’’ लेकिन ठाकुर जी कभी परीक्षा भी ले लेते हैं। इसलिए मैं, मैं नहीं करना चाहिए। यह बात कथा व्यास पूज्य इंद्रेश जी महाराज ने बालाजी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिवस मंगलवार को कही।
उन्होंने कहा जब ठाकुरजी ने अपनी छोटी उंगली पर गिरीराज जी को धारण किया तो ग्वाल बाल सहित अन्य लोगों ने अपनी लाठियां लगा दीं और आश्वस्त हो गए कि उनकी लाठियों के बल पर पर्वत टिका हुआ है। वे कन्हैया से बोले कि अपनी उंगली हटा लो हमने साध लिया है। कन्हैया बोले मैने उंगली हटाई तो पर्वत नीचे गिर जाएगा । ग्वाल बोले अरे इतनी सी उंगली से थोड़ी सधा हुआ है। यह जो हमने अपनी लाठियां लगाई हैं वह कुछ नहीं हैं क्या। हटा लो कन्हैया कुछ नहीं होगा। इतने कहना था कि जैसे ही कन्हैया ने नेक (ज़रा) उंगली हटाई और लाठियां टूट गईं।
ठाकुरजी भक्तों के लिए ईंट पर खड़े विट्ठल भी हैं
सोमवार को महाराज गंगा आरती में शामिल होने चकराघाट पहुंचे थे, जहां उन्होंने विट्ठल मंदिर एवं अष्टसखी मंदिर के दर्शन किए थे, जिसका उल्लेख महाराज ने आज कथा के दौरान किया। उन्होंने विट्ठल भगवान का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि पुंडरीक नाम के एक वैष्णव अपने माता पिता की सेवा करते रहते थे। उनकी सेवा भाव से भगवान प्रसन्न हो गए और पुंडरीक के घर पहुंच गए। भगवान कृष्ण और रुक्मणि को देख पुंडरीक बोले प्रतीक्षा करो अभी में अपने माता पिता कि सेवा कर रहा हूं। भगवान खड़े हो गए तब उनके माता पिता ने कहा उन्हें आसन तो दो। इसपर जल्दबाजी में पुंडरीक ने एक ईंट दे दी। भगवान उसी पर खड़े हो गए। मराठी में ईंट को वीट कहते हैं। तब भक्त की प्रतीक्षा में वीट पर ठाड़े (खड़े) भगवान विट्ठल हो गए।
एक घंटा कथा के लिए अवश्य समय निकालो
उन्होंने कहा सागर वालों सागर में कथा किसी की हो आप एक घंटा का समय निकाल कर कथा में जरूर जाएं चाहे कथा कोई भी वक्ता कर रहा हो। कथा सुनते हैं तो कथा के प्रति प्रीति बढ़ती है। ठाकुरजी को सात्विक व्यक्ति पसंद है। सागर सामान्य नहीं है यहां के लोग कथा नहीं सुनते ठाकुर जी की लीला सुनते है।
श्रोता मधुर भजनों पर कृष्ण भक्ति में झूम कर नाचते गाते रहे। वहीं विवाह गीत, श्रृंगार गीत के साथ कृष्ण रुक्मणि विवाह सम्पन्न हुआ। मधुर ब्रिज बोली से शब्दों ने अद्भुत रूप लिया और श्रोता भाव विभोर होते दिखाई दिए।
कथा की शुरुआत में मुख्य यजमान अनुश्री जैन, विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने सपरिवार आरती की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना महाप्रबंधक दीपक आर्य, डॉ. हरिसिंह गौर विवि की कुलपति डॉ. नीलिमा गुप्ता, भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, रिटायर्ड आयुक्त आरके माथुर, एडीजी पंकज श्रीवास्तव, मेजर जनरल कृष्णन जेल अधीक्षक मानवेन्द्र सिंह और एडीएम रूपेश उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।