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भाई दूज के अवसर पर परकोटा स्थित चित्रगुप्त मंदिर में कायस्थजनों ने एकत्रित होकर भगवान चित्रगुप्त की पूजा-अर्चना की। दूध-दही से अभिषेक कर कलम-दवात की पूजा की गई। अभिषेक पश्चात कायस्थ बंधुओं ने हवन किया। इस अवसर पर फूलों की होली भी खेली गई और सभी ने एक दूसरे ने गले लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं।
समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी के 11 लाख वर्षों की तपस्या के समय उनकी काया से उत्पन्न देव चित्रगुप्त धर्माधर्म का लेखा-जोखा रखने व तदानुसार न्याय के देवता के रूप में पृथ्वी पर पूजे जाते हैं। देव चित्रगुप्त पाप-पुण्य और कर्मों का लेखा-जोखा रखने का कार्य करते हैं, इसलिए इनका मुख्य कार्य लेखनी से जोड़कर देखा जाता है, यही कारण है कि भाई दूज के दिन चित्रगुप्त के प्रतिरूप के तौर पर कलम या लेखनी का पूजन भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चित्रगुप्त का पूजन करने से बुद्धि, वाणी, लेखनी व दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पूजन कार्यक्रम में जागेश्वर श्रीवास्तव, राजेंद्र श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव, मोहन खरे, शैलेंद्र श्रीवास्तव, अशोक श्रीवास्तव, एमके सक्सेना, सतीश श्रीवास्तव, ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव, विनोद श्रीवास्तव, राजकुमार श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव हिलगन, विजय श्रीवास्तव, सीताराम, कमलेश खरे, संतोष, राजेश, अभिषेक सक्सेना, रामकुमार श्रीवास्तव, अजय आदि शामिल हुए।
Published on:
17 Mar 2025 05:06 pm
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