
Dr. Hari Singh Gaur Sagar Central University
सागर. नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) ने सोमवार को रैकिंग जारी की। इस बार भी डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि टॉप १०० में शामिल नहीं हो सका है। विवि ने ओवरऑल श्रेणी में हिस्सा लिया था। पिछली बार की तरह इस बार भी विवि टॉप १०० में जगह नहीं बना पाया है।
जानकारी के अनुसार रैकिंग गिरने का मुख्य कारण छात्रों के शैक्षणिक स्तर में गिरावट आना। शोध कार्यों की क्वालिटी बेहतर न हो पाना है। इसके अलावा विश्व की साइंस डाइटेशन इंडेक्स जर्नल्स की सूची में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। रैंकिंग में सुधार न होने से विवि को भी एमएचआरडी की तरफ से ग्रांट नहीं मिल पाएगी। २०१७ में विवि ने देश में ३९वीं रैकिंग हासिल की थी, लेकिन उसे विवि प्रशासन आगे पढ़ाने में सफल नहीं हो पाया है।
उधर, विवि के नाम को पार्टिसिपेट करने वाले ४३ संस्थानों के साथ जगह मिली है। यह ४३ भी १४७९ संस्थान में से हैं। इस बार विवि के फार्मेसी विभाग ने हिस्सा ही नहीं लिया। २०१८ में भी विभाग ने रुचि नहीं दिखाई थी। इंजीनियरिंग और फार्मेसी में सागर से एडिना इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, एडिना इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस ने हिस्सा लिया था।
यह है एनआइआरएफ : एमएचआरडी ने देश के उच्च शैक्षिक संस्थानों की सरकारी तौर पर रैंकिंग के लिए यह संस्था बनाई है। 29 सितंबर 2015 को तत्कालीन एमएचआरडी मंत्री स्मृति इरानी ने लांच किया था। इससे पहले शैक्षिक संस्थानों की रैकिंग के लिए कोई सरकारी व्यवस्था नहीं थी।
क्या यह रही होगी वजह
रैकिंग के लिए कई पैरामीटर होते हैं। कई बिंदुओं पर रैकिंग दी जाती है। इनमें सबसे प्रमुख बिंदु विद्यार्थियों के उत्तीर्ण होने का है। जानकारी के अनुसार शत प्रतिशत छात्र यदि परीक्षा में उत्र्तीण होते हैं तो रैंकिंग बढ़ती है। देखा जाए तो कहीं न कहीं इस बिंदु पर विवि को मेहनत करने की जरूरत है। विवि में जो शोध हो रहे हैं, वह भी संभवत: क्वालिटी आधारित नहीं है। रैकिंग में इसे भी काउंट किया जाता है। विवि प्रशासन को चाहिए कि शोध की क्वालिटी को बेहतर बनाए और चयन पर विशेष फोकस रखा जाए। विश्व की २ से ३ हजार जर्नल्स की सूची में अभी तक विवि के जर्नल्स जगह नहीं बना पाए हैं। यह भी रैकिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
Published on:
09 Apr 2019 02:28 pm
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