
सागर. प्रसूताएं महज एक कंबल के भरोसे कड़ाके की सर्दी से जूझ रही हैं। डफरिन अस्पताल में जच्चा-बच्चा के लिए कंबल के अलावा कोई व्यवस्था नहीं है। कई बार तो कंबल भी नसीब नहीं हो पाता। शुक्रवार को हालात कुछ यही बयां कर रहे थे। कई प्रसूताएं घर से लाए गए इक्का-दुक्का कंबल को ओढ़े दिखाई दीं। ऐसे में जच्चा-बच्चा को निमोनिया की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रतिदिन 30 डिलेवरी
सितंबर से दिसंबर तक अस्पताल में प्रसूताओं की संख्या बढ़ जाती है। अभी डफरिन में प्रतिदिन औसतन 30 डिलेवरी हो रही हैं। यहां प्रसूताओं के लिए करीब 150 बेड हैं। इनके लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा बेड शीट के अलावा ठंड में एक कंबल दिया जाता है। गद्दों पर प्लास्टिक कवर होने के कारण सिंगल चादर बिछाने पर भी ये गर्माते नहीं हैं।
बहू को डिलेवरी के लिएतीन दिन से भर्ती कराया है। अस्पताल से कंबल नहीं मिला है। वार्ड की खिड़कियां बंद रहती हैं, लेकिन रात के समय ठंड लगती है। घर से कंबल लेकर आए हैं।
हेमलता, बड़े करीला
बहू की डिलेवरी हुई है। चार दिन से यहां पर हैं, अस्पताल द्वारा कंबल नहीं दिया है। बच्चे को गर्म कपड़े मिले हैं। ठंड से बचने के लिए घर से कंबल लाए हैं। हीटर आदि की भी व्यवस्था नहीं है।
जाकिर अली, शनिचरी सागर
वार्ड में हीटर तो नहीं हैं, परिजन घर से लाए कंबल ही उपयोग करते हैं
ठंड से प्रसूताओं को बचाने के लिए वार्ड में हीटर तो नहीं है, लेकिन उन्हें कंबल आदि दिया जाता है। कई प्रसूताओं के परिजन अस्पताल से कंबल नहीं लेते हैं। वह अपने साथ घर से लाया हुआ कंबल उपयोग करते हैं । अभी तक मरीजों अथवा उनके परिजनों द्वारा ऐसी कोई शिकायत नहीं की गई है कि अस्पताल से कंबल आदि नहीं मिलते हैं,
डॉ. अभिताभ जैन, सिविल सर्जन जिला अस्पताल
Published on:
23 Dec 2017 04:23 pm
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