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नाटक रिजक की मर्यादा ने दिखाया समाज को आइना

मोतीनगर स्थित पदमाकर सभागार में मप्र शासन के संस्कृति विभाग और मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय भोपाल के सहयोग से 5 दिवसीय रंग प्रयोग नाट्य समारोह का आगाज बुधवार को हो गया।

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सागर

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Rizwan ansari

Oct 17, 2024

मोतीनगर स्थित पदमाकर सभागार में नाटक रिजक की मर्यादा की प्रस्तुति 

मोतीनगर स्थित पदमाकर सभागार में नाटक रिजक की मर्यादा की प्रस्तुति 

मोतीनगर स्थित पदमाकर सभागार में रंग प्रयोग नाट्य समारोह शुरू, कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को बांधा

सागर. मोतीनगर स्थित पदमाकर सभागार में मप्र शासन के संस्कृति विभाग और मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय भोपाल के सहयोग से 5 दिवसीय रंग प्रयोग नाट्य समारोह का आगाज बुधवार को हो गया। मुख्य अतिथि सांसद डॉ. लता वानखेड़े, विधायक शैलेंद्र जैन, अपर कलेक्टर रुपेश उपाध्याय, निदेशक टीकम जोशी ने दीप प्रज्वलन के साथ शुरुआत नाटक की शुरुआत की। पहले दिन नाटक रिजक की मर्यादा का मंचन किया गया। नाटक रिजक की मर्यादा विजय दान देथा के लघु उपन्यास का नाट्य रूपांतरण है। इसमें बहुरूपिए शंकर भांड के माध्यम से छल कपट से भरे समाज और मनुष्य के दोहरे चरित्र पर गहरा कटाक्ष किया गया है। मानव हमेशा स्वार्थ के लिए दूसरों को दु:ख देकर खुश रहना चाहता है और स्वार्थ पूर्ति के लिए हमेशा दोहरा चरित्र ओढ़े रखता है। सांसारिक जगत में नाम कमाना धन कमाना इस दोहरे चेहरे से आसान है, लेकिन सच के साथ जीवन जीना कबीर या बुद्ध बनना नामुमकिन है। विज्ञान इस युग में मानव रस और भाव को स्वार्थ सिद्ध के मारकर रोबोट बन रहा है और रिश्तों को मानवीय मूल्यों को कुचल रहा है। अब मनुष्य ही मनुष्य का दुश्मन बन रहा है तो प्रकृति की देखभाल कौन करेगा। नाटक में कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को बांध के रखा। नाटक का संगीत भी दर्शकों में आध्यात्मिकता के विचार पैदा करने में सफल रहा।
इन्होंने दी मंच पर प्रस्तुति
नाट्य मंचन में शारोन मेरी मसीह, हिमाद्रि व्यास, संजना, अभिषेक मंडोरिया, अर्पित ठाकुर, गौतम सारस्वत, प्रदीप तिवारी, रोहित खिलवानी, अभय आनंद बडोनी, कनिश्क द्विवेदी और विशाल बरुआ आदि ने भूमिकाएं निभाई। जबकि संगीत पक्ष की जिम्मेदारी को सागर शुक्ला और संजय कोरी ने बखूबी निभाया। प्रकाश संयोजन प्रसन्न सोनी का रहा। स्थानीय समन्वयन शहर की युग्सृष्टि थिएटर समिति ने किया।
आज होगा नाटक सुहाने अफ साने
युवा रंगकर्मी आकाश विश्वकर्मा ने बताया कि आज 17 अक्टूबर को नाटक सुहाने अफ साने का मंचन किया जाएगा। जिसे नील सायमन लिखा है। निर्देशन विद्यानिधि बनारसे ने किया है, जिसमें अलग अलग 6 कहानियों को पिरोया गया है। आयोजन के स्थानीय समन्वयक अभिषेक दुबे एवं मयंक विश्वकर्मा ने इस समारोह में नि:शुल्क प्रवेश है।