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एक ही बैंक खाते पर एक दर्जन किसानों के पंजीयन, 6769 किसानों के पंजीयन संदिग्ध

गेहूं पंजीयन में फर्जीवाड़ें की आशंका, कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए

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Farmer, False Registration, Bank, Wheat, Collector

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सागर. प्रदेश सरकार द्वारा किसानों से २ हजार रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने से पहले ही फर्जीवाड़ा सामने आया है। अब तक हुए किसानों के पंजीयन में कहीं एक ही बैंक खाते पर एक दर्जन किसानों के पंजीयन कर दिए गए हैं तो कहीं एक ही मोबाइल नंबर से ५-५ किसानों के पंजीयन किए गए हैं। गलती पंजीयन करने वालों की है या किसानों की? यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन पंजीयन में हुई इस प्रकार की गलती को लेकर कलेक्टर आलोक कुमार सिंह ने एसडीएम और तहसीलदारों को गंभीरता के साथ जांच करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि किसी ने पंजीयन के सत्यापन में लापरवाही की है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन कराने जिला प्रशासन ने किसानों को २८ फरवरी तक का समय दिया था। इसमें केवल उन किसानों को ही पंजीयन कराने थे, जिन्होंने पिछले साल पंजीयन नहीं कराया था। सहकारिता विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि पुराने पंजीयनों का भी राजस्व विभाग से सत्यापन कराकर अपडेट किया जाए। इसी बीच शासन ने गेहूं का समर्थन मूल्य और बोनस को मिलाकर किसानों को २ हजार रुपए प्रति क्विंटल भुगतान करने की घोषणा कर दी। पिछले साल जिलेभर के १२३ उपार्जन केंद्रों पर 39 हजार पंजीयन कराए थे, यह संख्या बढ़कर 57 हजार के पार पहुंच गई। इसी को लेकर प्राथमिक तौर पर की गई जांच में कई खामियां सामने आई हैं।

ऐसे सामने आया मामला
कलेक्टर द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि पंजीयन में कुछ बैंक खाते और मोबाइल नंबर कई किसानों के पंजीयन में उपयोग किए गए हैं। एक ही बैंक खाते पर एक से अधिक किसानों के नाम होने वाले पंजीयन की संख्या ६७६९ बताई गई है। कलेक्टर ने इन सभी पंजीयनों की जांच अलग से करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा है कि शासन की गेहूं उपार्जन और किसान प्रोत्साहन राशि का गलत तरीके से लाभ उठाने की पुष्टि होने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

रकबा की भी जांच रिपोर्ट देना होगी
समर्थन मूल्य में नए पंजीयन कराने वाले किसानों का सत्यापन कराने के लिए कलेक्टर ने एसडीएम, तहसीलदार, खाद्य और कृषि विभाग के अधिकारियों की एक टीम गठित की है, जो नए किसानों की जांच करेगी। पटवारी के सत्यापित प्रपत्रों में से 10 प्रतिशत तहसीलदार को और 5 प्रतिशत अनुविभागीय अधिकारी को दोबारा चैक करने होंगे। पंजीयन के अलावा किसानों के रकबा की भी पटवारियों को रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किसानों ने जिस उपज का पंजीयन कराया है वह कितने रकबे में बोई गई है।

क्रॉस चैक नहीं किए
खरीदी के पहले ही पंजीयन क्रॉस चैक नहीं किए गए। सत्यापन करने वालों ने लापरवाही बरती है। एक बैंक खाता नंबर का एक दर्जन लोगों के पंजीयन में शामिल होना कहीं न कहीं जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

पहले भी फर्जीवाड़ा
बीते साल सरकार ने प्याज खरीदी के लिए समर्थन मूल्य तय किया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने माना था कि खरीदी में किसानों से ज्यादा व्यापारियों या बिचौलियों ने प्याज बेची है। चूंकि गेहूं खरीदी २ हजार रुपए प्रति क्विंटल होना है, इसलिए इन अनियमितताओं को भी प्याज खरीदी के फर्जीवाड़ा से जोड़ा जा रहा है।

कुछ बैंक खाते और मोबाइल एक से अधिक किसानों के पंजीयन में उपयोग किए गए हैं। पिछले साल की तुलना में पंजीयन की संख्या भी बड़ी है। जांच के करा रहे हैं।
-आलोक कुमार सिंह, कलेक्टर