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धूमधाम से मनाया गुड़ी पड़वा का पर्व, नए वर्ष की दीं शुभकामनाएं

शहर में महाराष्ट्रियन समाज ने शनिवार को गुड़ी पड़वा धूमधाम से मनाया गया। घरों से श्रीखंड, पूरन पोली, बासुंदी, खीर, भजिये और आलू जैसै पकवान बनाए गए। दरवाजे पर सुंदर रंगोली बनाई गई थी।

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सागर

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Atul Sharma

Apr 03, 2022

धूमधाम से मनाया गुड़ी पड़वा का पर्व, नए वर्ष की दीं शुभकामनाएं

धूमधाम से मनाया गुड़ी पड़वा का पर्व, नए वर्ष की दीं शुभकामनाएं

सागर.शहर में महाराष्ट्रियन समाज ने शनिवार को गुड़ी पड़वा धूमधाम से मनाया गया। घरों से श्रीखंड, पूरन पोली, बासुंदी, खीर, भजिये और आलू जैसै पकवान बनाए गए। दरवाजे पर सुंदर रंगोली बनाई गई थी। शुभ मुहूर्त के मुताबिक गुड़़ी की स्थापना की और उसकी पूजा की। बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिया और सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।

स्वाति हल्वे ने बताया कि गुड़ी का अर्थ है विजय पताका। कहा जाता है कि इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी होता है। महाराष्ट्रीयन परिवारों में इस दिन पूरन पोली या मीठी रोटी बनाई जाती है। इसमें जो चीजें मिलाई जाती हैं, वे हैं-गुड़, नमक, नीम के फूल, इमली और कच्चा आम। गुड़ मिठास के लिए, नीम के फूल कड़वाहट मिटाने के लिए और इमली व आम जीवन के खट्टे-मीठे स्वाद चखने का प्रतीक होते हैं।

स्वाति हल्वे ने बताया गुड़ी पड़वा अर्थात हिन्दू नव वर्ष। जो कि नव सम्वत्सर के रूप में पहचाना जाता है। दक्षिण भारत मे इसी दिन उगादि पर्व मनाया जाता है और इसका अर्थ भी नव वर्ष से ही जुड़ा है। नया वर्ष यानी नई आशाओं व शुभता के आगमन का प्रतीक। चैत्र माह की प्रतिपदा यानी पहली तिथि के उस नव वर्ष के साथ ही शुरू हो जाता है चैत्र नवरात्र का पर्व भी। अर्थात देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना का समय। इस लिहाज से यह समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। महाराष्ट्रियन समाज ने शनिवार को गुड़ी पड़वा धूमधाम से मनाया गया।