
पूर्व गृहमंत्री सह खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह के बयान के बाद से प्रशासनिक व राजनीतिक गलियारों में हड़कंप की स्थिति बन गई है। भूपेंद्र सिंह का आरोप है कि सागर जिले में पिछले 5-6 महीनों में पुलिस के निचले स्तर के अधिकारियों-कर्मचारियों ने सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) निकालकर कुछ लोगों को धमकाने व उनसे पैसे वसूलने का काम किया है। उन्होंने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और डीजीपी को पत्र लिखकर भी की है।
बीते दिन भी उन्होंने सागर में आयोजित हुई जिला योजना समिति की बैठक में यह बात उपमुख्यमंत्री सह सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल के सामने रखी थी। भूपेंद्र सिंह ने पत्र में कहा है कि सीडीआर मामले की जांच होनी चाहिए। पिछले 5-6 महीनों में किस-किस की सीडीआर निकाली गई है? किसकी अनुमति से निकाली गई है? किस कारण से निकाली गई है?
भूपेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने कुछ समय पहले सागर पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत तौर पर फोन के माध्यम से सीडीआर को लेकर अवगत कराया था, लेकिन यह सिलसिला जारी है। इसके बाद मैंने सीएम और डीजीपी को पत्र लिखा।
सिंह ने कहा कि सीडीआर का मामला राजनीतिक नहीं है। उनके पास लगातार ऐसी शिकायतें आ रहीं थीं कि लोगों को डराया-धमका जा रहा है। किसी का भी व्यक्तिगत डाटा एसपी व आइजी के स्वीकृति के बिना नहीं निकाला जा सकता है, तो फिर निचले स्तर के पुलिसकर्मी यह काम कैसे कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि यह कौन करवा रहा है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए।
सीडीआर बिना आइजी व एसपी के स्वीकृति के नहीं निकाली जा सकती है। इस बात से पुलिस अधीक्षक ने पूर्व गृहमंत्री को अवगत कराया है। इसके साथ ही हम सीडीआर को लेकर विभागीय तौर पर पिछले 5-6 माह के प्रकरणों की समीक्षा भी कर रहे हैं। पूर्व गृहमंत्री से भी अनुरोध किया गया है कि वह भी उन केसों को पुलिस के साथ सांझा करें, जो उनके सामने आए हैं, तो जांच करने में और आसानी होगी।
- प्रमोद वर्मा, आइजी सागर
Updated on:
09 Nov 2024 05:33 pm
Published on:
08 Nov 2024 05:20 pm
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