
वर्तमान में चौराहे पर वाहनों की स्थिति
बीना. शहर का मुख्य सर्वोदय चौराहा, जहां से चौबीसों घंटे वाहनों की आवाजाही से ध्वनी और वायु प्रदूषण हो रहा है, जिससे आसपास रहने वाले लोग, दुकानदारों को परेशानी हो रही है। लोगों में चिड़चिड़ापन भी बढ़ रहा है। चौदह साल की अपेक्षा करीब 15 गुना ज्यादा वाहन यहां से निकलने लगे हैं।
रिफाइनरी, जेपी जैसे उद्योग शहर में आने से और चारों तरफ से कनेक्टिविटी बढऩे के बाद चौराहे से चौबीसों घंटे भारी वाहनों सहित छोटे वाहन निकल रहे हैं। प्रेशर हॉर्न और वाहनों की आवाज से ध्वनि प्रदूषण फैल रहा है। साथ ही वायु प्रदूषण भी फैल रहा है, जो लोगों को बीमार बना रहा है। चिड़चिड़ापन के साथ-साथ अन्य बीमारियों की चपेट में लोग आ रहे हैं।
तेज हॉर्न से खुल जाती ही नींद
चौराहे पर रहने वाले कैलाश पाराशर ने बताया कि चौदह वर्षों में करीब १५ गुना से ज्यादा वाहन चौराहे से निकलने लगे हैं। तेज हॉर्न से कई बार रात में नींद खुल जाती है। पहले दिन में भी बहुत कम संख्या में वाहन निकलते थे और रात के समय गिने-चुने वाहन ही निकलते थे। अब वाहनों की संख्या बढऩे से लोग बीमार हो रहे हैं।
चौबीसों घंटे रहता है शोर
चौराहे पर दुकान चलाने वाले आत्माराम साहू ने बताया कि शहर में जो ब्रिज बन गए हैं या बनने वाले हैं वह चौराहे को जोड़ रहे हैं। सभी वाहन चौराहे से ही निकलते हैं। वाहनों की आवाज से दुकान पर बैठना मुश्किल रहता है, इससे चिड़चिड़ापन आ रहा है और अन्य बीमारियां हो रही हैं। पहले कम लोगों के पास वाहन थे, आज हर घर में एक से ज्यादा वाहन हैं।
शहर के बाहर से निकलें वाहन तो मिले राहत
शहर से निकलने वाले वाहनों को यदि बाहर से निकाला जाए, तो इस समस्या से निजात मिल सकती है। नहीं तो आने वाले समय में स्थिति और खराब होगी। बड़े वाहनों से ही सबसे ज्यादा ध्वनि और वायु प्रदूषण फैल रहा है। साथ ही प्रेशर हॉर्न लगाने वालों पर भी कार्रवाई होना जरूरी है।
एक्सपर्ट व्यू
डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण से एकाग्रता भंग हो जाती है, बहरापन होने का खतरा रहता है और भ्रम की स्थिति बनने लगती है। साथ ही वायु प्रदूषण से फैफड़ों और त्वचा संबंधी बीमारियों के साथ-साथ आंखों में परेशानी होने लगती है।
Published on:
09 Apr 2025 12:17 pm
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